
बच्चों की प्रस्तुतियों ने अतिथियों का मोहा मन
Lalitpur News - फोटो- 4कैप्सन- आचार्यश्री विद्यासागर संस्कार वर्णी पाठशाला में मंच पर आयोजकबच्चों की प्रस्तुतियों ने अतिथियों का मोहा मनआचार्यश्री विद्यासागर संस्कार
मड़ावरा। आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज की प्रेरणा व निर्यापक मुनिश्री सुधासागर महाराज के निर्देशन से संचालित आचार्य विद्यासागर संस्कार वर्णी पाठशाला में वार्षिकोत्सव उल्लास और संस्कारों से मनाया गया। इस दौरान मंच पर नन्हें बच्चों की प्रस्तुतियों से सभागार भावविभोर हो उठा। तालियों की गड़गड़ाहट रुकने का नाम नहीं ले रही थी। कार्यक्रम की शुरुआत मंगल प्रस्तुति मंगलाचरण से हुई। जिसमें समाधिस्थ आचार्य महाराज की महाप्रयाण शोभा यात्रा की झांकी ने सभी की आंखें नम कर दीं। उनके समाजहितकारी कार्यों और सहयोगी संस्थाओं पूर्णायू, प्रतिभास्थली और हथकरघा की प्रेरणादायी झलकियों ने समर्पण और सेवा की भावना को जीवंत किया। इसके बाद बच्चों की भक्ति प्रस्तुति ‘आओ रे आओ रे विद्यासागर मेरे आंगणा’ ने वातावरण को पूर्णत: श्रद्धामय बना दिया।

सफेद परिधान में छोटे बच्चों का गीत ‘तुझ में रब दिखता है’ मासूम भक्ति और कोमल भावनाओं का सुंदर प्रतीक बना। राजस्थानी परिधान में प्रस्तुत कव्वाली ‘कामयाबी मिसाल है, कमाल की राष्ट्र प्रेम’ ने देशभक्ति और जोश का रंग भरा, वहीं बालिकाओं की राजस्थानी थीम पर प्रस्तुति ‘आओ पधारो हे जिन भगवान, मंगल घड़ी जिन दर्शन की’ ने दर्शकों को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। सबसे छोटे कलाकारों का गीत ‘आओ जी आओ जी महावीर मोरे आंगणा’ और सामूहिक प्रस्तुति ‘लहरा दो जिनशासन का परचम लहरा दो’ ने पूरे सभागार में आनंद और उत्साह की लहर दौड़ा दी। कार्यक्रम का समापन बच्चों ने एक भावनापूर्ण लघु नाटिका प्रस्तुत की, जिसमें उन्होंने सेवा, अनुशासन और नैतिकता के मूल्यों को जीवंत अभिनय से अभिव्यक्त किया। पूरे आयोजन का संचालन पाठशाला की शिक्षिकाओं ने अत्यंत सौहार्दपूर्ण और प्रेरक ढंग से किया। कार्यक्रम के दौरान आचार्य विद्यासागर संस्कार वर्णी पाठशाला मड़ावरा के पदाधिकारियों और सदस्यगणों ने विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।

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