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लखीमपुरखीरीजहां दिखते हैं सिर्फ बाघ, वहां दिखने लगा चीतल हिरणों का कुनबा

हिन्दुस्तान टीम,लखीमपुरखीरीPublished By: Newswrap
Tue, 01 Jun 2021 03:31 AM
जहां दिखते हैं सिर्फ बाघ, वहां दिखने लगा चीतल हिरणों का कुनबा

महेशपुर-खीरी।

बाघों की सल्तनत वाले महेशपुर जंगल में पहली बार चीतलों का कुनबा नजर आया है। चीतल बाघ का पसंदीदा भोजन है। इस रेंज में करीब 27 बाघ हैं। ऐसे में यहां पर चीतलों का बड़ा झुंड दिखना बेहद चौंकाने वाला माना जा रहा है। हालांकि जानकारों का कहना है कि कोरोना कर्फ्यू में जंगल के शांत वातावरण की वजह से वन्यजीव आराम से इधर-उधर आ जा रहे हैं। अबतक दुधवा में ही चीतलों का बसेरा था।

महेशपुर वन क्षेत्र के महेशपुर बीट के महेशपुर गांव में कठिना नदी के किनारे मन्दिर के पास चीतलों का झुंड दिखाई दिया। तीस-तीस चीतलों का झुंड यहां विचरण कर रहा था। सोमवार दोपहर गांव महेशपुर निवासी राम निवास, अजीत कुमार सहित कई चरवाहे कठिना नदी के किनारे बने मंदिर के पास मवेशी चरा रहे थे। गांव के प्रधान अमर सिंह , मंदिर के पुजारी चेत राम, परमेश्वर दीन, लाला ठाकुर, राम प्रसाद मंदिर में पूजा करने के लिये गये थे। इसी बीच एकाएक करीब 30 चीतलों का झुंड नदी में पानी पीने आ गया। चीतलों के झुंड देखकर सभी लोग खुश हो गए। वन विभाग को सूचित किया गया। वन विभाग ने उस इलाके और नदी किनारे सुरक्षा बढ़ा दी है। जिससे चीतलों के इस कुनबे पर शिकार का डर न हो।

बाघों का है पसंदीदा ठिकाना है महेशपुर

कठिना नदी का कछार बाघों का पसंदीदा ठिकाना है। यहां अनुकूल वातावरण होने से महेशपुर के छोटे जंगल में 27 के करीब बाघ हैं। तीन वर्षों से इस इलाके में बाघों ने कई घटनाएं की हैं और कई दफा वे भी हादसे के शिकार हुए हैं। लोगों का कहना है कि इस इलाके में चीतल कभी नहीं पाए जाते थे। पहली बार वे इस जंगल में आए हैं।

बाघों का पसंदीदा भोजन हैं चीतल

बाघ तृणभोजी वन्यजीवों का शिकार करता है। उनमें से चीतल बाघों का पसंदीदा है। जहां बाघों की अधिकता है वहां 30-30 चीतलों का झुंड पाया जाना विशेषज्ञों के लिए भी हैरान करने वाला है। चीतलों को बाहरी शिकारियों से बचाने के लिए वनविभाग ने सुरक्षा कड़ी कर दी है।

माहौल शांत तो चीतल बने मेहमान

रेंजर मोबीन आरिफ का कहना है कि इस वक्त जंगल की सुरक्षा कड़ी है। आगजनी की घटनाओं के बाद से चरवाहों का प्रवेश रोक दिया गया था। उधर दुधवा टाइगर रिजर्व में भी इंसानी गतिविधियां नहीं चल रही हैं। यही वजह है कि जंगल के शांत वातावरण में वन्यजीव इधर से उधर विचरण कर रहे हैं। यह अच्छा संकेत है।

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