आजादी के बाद से ‘थारंटनस्मिथ’ से छुटकारा चाहते हैं यहां के ग्रामीण
Lakhimpur-khiri News - मितौली ब्लाक के गांव 'थारंटनस्मिथ' का अंग्रेजी नाम ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन गया है। गांव वाले इस जटिल नाम से निजात पाने के लिए कई बार अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं। उनका कहना है कि सरकारी कागजों पर इस नाम को लिखना कठिन है और बच्चों को स्कूल में भी इसे बोलने में परेशानी होती है।

मितौली ब्लाक के गांव ‘थारंटनस्मिथ’ के नाम से गांव को लेकर टेंशन में हैं। गांव का अंग्रेजी नाम इतना कठिन है कि न गांव वाले उसे पुकार पाते हैं और न ही छोटे बच्चे लिख ही पाते हैं। हालत यह है कि गांव वाले खुद अपनी ही ग्राम पंचायत का नाम न आधार में लिखा पा रहे और न ही वोटर कार्ड में। गांव वाले अब इस अंग्रेजी नाम से निजात पाना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने कई बार अफसरों और नेताओं से गुहार लगाई है। खीरी जिले के मितौली ब्लॉक में दक्षिण खीरी के जंगलों और कठिना नदी के बीच बसे इस गांव का अंग्रेजी नाम कब और कैसे पड़ा कोई नहीं जानता।
बस गांव वाले इतना ही बताते हैं कि उनकी कई पीढ़ियां इसी नाम से गांव को जानती रही हैं। अब बताते हैं आपको इस गांव का नाम। इस गांव का नाम है ‘थारंटनस्मिथ’। इतना लंबा, अंग्रेजी और जटिल नाम गांव वालों के लिए मुसीबत बना हुआ है। हालत यह है कि गांव के प्रधान से लेकर स्कूल के बच्चे भी अपने गांव का नाम नहीं ले पाते। उसकी जगह पर मन से अन्य नाम बताने लगते हैं। थारंटनस्मिथ ग्राम पंचायत के है दो मजरे - मितौली ब्लॉक के थारंटनस्मिथ गांव को ग्राम पंचायत का दर्जा है। यहां दो हजार के करीब आबादी है। दो मजरे भी यहां हैं। गांव के स्कूल, पंचायत भवन, आंगनवाड़ी केंद्र और लोकनिर्माण विभाग की सड़कों के बोर्डों पर भी यही नाम लिखा हुआ है। गांव वालों को सरकारी कागजों में थारंटनस्मिथ लिखना पड़ता है, जो हर बार सिरदर्द बन जाता है। बच्चे स्कूल में गांव का नाम पूछे जाने पर हकलाने लगते हैं, जबकि प्रधान और बीडीसी सदस्यों को सरकारी बैठकों में इसे बोलते समय असहज होना पड़ता है। गांव के प्रधान सोबरन लाल कहते हैं कि गांव का नाम अजीब है। लेकिन यह पंचायत का नाम है तो सरकारी रिकॉर्ड सब इसी के हिसाब से है। इसलिए हम लोग कुछ कर नहीं सकते। कहीं जाते हैं तो गांव का नाम कागज की पर्ची पर लिख लेते हैं। अंग्रेज अफसर की पत्नी के नाम पर गांव? - इस गांव का अंग्रेजी नाम कैसे पड़ा, कोई नहीं जानता। गांव वाले बताते हैं कि आजादी से पहले एक अंग्रेज अफसर ने गांव का दौरा किया और अपनी पत्नी के नाम पर गांव का नामकरण कर दिया। हालांकि इस बात की पुष्टि नहीं होती। क्योंकि गांव में न तो अंग्रेजों कोई पुराना गेस्ट हाउस होने के निशान हैं और न ही कोई ऑफिस आदि ही। इस क्षेत्र के रहने वाले भाजपा जिला मंत्री बृजेश सिंह कहते हैं कि 1857 के गदर के समय मितौली अंग्रेजों का प्रमुख केंद्र था। यहां से वह शाहजहांपुर और सीतापुर जिले की निगरानी करते थे। हो सकता है कि उस समय किसी ने यह नाम रख दिया हो। गांववासी सालों से नाम बदलने की मांग कर रहे हैं।
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।



