The people who came forward to save the trick will run the campaign - सतौती बचाने के लिए आगे आए लोग, चलाएंगे मुहिम DA Image

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सतौती बचाने के लिए आगे आए लोग, चलाएंगे मुहिम

सतौती बचाने के लिए आगे आए लोग, चलाएंगे मुहिम

हिन्दुस्तान ने पौराणिक सतौती सरोवर की बेकद्री और कब्जे का मामला उजागर किया तो लोग साथ आने लगे हैं।सरोवर को उनके मूल स्वरूप में लाने के लिए हर कदम उठाए जाएंगे। बुधवार को ट्रेडर्स इंड्रस्टीज एंड वेलफेयर एसोसिएशन और समस्या समाधान परिवार के लोगों ने पौराणिक सतौती सरोवर पर अवैध कब्जे को लेकर अपना गुस्सा दिखाया और फिर एसडीएम को ज्ञापन सौंपने के लिए तहसील पहुंचे जहां एसडीएम की गैर मौजूदगी में तहसीलदार विपिन द्विवेदी को ज्ञापन सौंपकर सतौती सरोवर में हो रहे अवैध कब्जे पर तत्काल रोक लगाए जाने की मांग की।

संगठन के शहर अध्यक्ष रजनीश गुप्ता ने ज्ञापन में कहा है कि भगवान भोलेनाथ की पावन नगरी गोला गोकर्णनाथ छोटी काशी का वर्णन पुराणों में दर्ज है जिसमें सतौती सरोवर भी एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है जो प्रतिदिन भू माफियाओं की वजह से छोटा होता जा रहा है। उनकी मांग है कि पौराणिक धरोहर को बचाने के लिए सरोवर की पुन: पैमाइश कराई जाए। पुराने नक्शे से नए नक्शे का मिलान कराया जाए। अवैध कब्जेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कराई जाए। नगर पालिका परिषद द्वारा कराई जा रही बाउंड्रीबाल का कार्य जल्दी पूरा कराया जाए। ज्ञापन सौंपने वालों में रजनीश गुप्ता, क्रषांग गुप्ता, आमिर खान सईदी, अमोलख सिंह जोशन, जुनैद अहमद इराकी, विधुशेखर अवस्थी, मतीन अहमद, अमित गुप्ता आदि लोग शामिल थे।

प्लाटिंग भी और पटाई भी

सतौती सरोवर में न सिर्फ पटाई चल रही है, बल्कि प्लाटिंग भी की जा रही है। प्लाटिंग करने वाले दावा कर रहे हैं कि जमीन उनकी है। उनके पास कागज हैं कि वह यहां हकदार हैं। उधर तमाम लोग प्लाट खरीद चुके हैं। सरोवर की चौहद्दी को लेकर उठे विवाद से वे भी परेशान हैं। उनको डर है कि कहीं उनकी जमीन तो सरोवर में नहीं हैं। पुराने लोग बताते हैं कि आज से दस साल पहले सरोवर ही सरोवर था। उसमें जलकुम्भी उगी हुई थी। कभी यहां कोई निर्माण दिखा ही नहीं। पर अचानक से सरोवर का दायरा घट गया।

यह है सतौती का महत्व

सतौती सरोवर का कथाओं में महत्व है। बताते हैं कि रावण भगवान शिव से वरदान मांग कर उनको लंका लेकर जा रहा था। वह गोला गोकर्णनाथ पहुंचा, जहां उसे जोर की लघुशंका आ गई। निपटान के लिए उसने शिवलिंग एक ग्वाले को पकड़ाया और उसी जगह चला गया, जहां आज सतौती है। कहा तो ये भी जाता है कि सतौती कभी सूखती नहीं थी। पर अब वह मिट्टी में दफन होने लगी है।

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