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गमजदा माहौल में हुआ अंतिम संस्कार

पीलीभीत के गजरौला में हुए हादसे में जान गंवाने वाली महिला और दस साल की बच्ची का शनिवार को अंतिम संस्कार कर दिया...

गमजदा माहौल में हुआ अंतिम संस्कार
हिन्दुस्तान टीम,लखीमपुरखीरीSat, 11 May 2024 10:45 PM
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सिंगाही। पीलीभीत के गजरौला में हुए हादसे में जान गंवाने वाली महिला और दस साल की बच्ची का शनिवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान दोनों गांवों में उनके घरों में मातम का माहौल छाया रहा। लोग परिवार के लोगों को सांत्वना देने पहुंचे। इस बीच हादसे में घायल सभी लोग वापस लौट आए हैं।
मेरठ से मजदूरी करने के बाद वापस घर जाते समय पीलीभीत जिले के गजरौला में पेड़ से गाड़ी टकराने से तीन लोगों की मौत हो गई थी। इनमें दो सिंगाही थाने के टांडा और नौरंगाबाद गांवों के हैं। अस्पताल में भर्ती कराए गए घायल नौरंगाबाद निवासी परसादी, धर्मेंद्र, संजू, पुष्पा और सानू तथा टांडा के इम्तियाज, अभिषेक इश्तियाक, मायरा, अरबाज अली, राजबीना, साजिया बानो सभी पीलीभीत से अपने घर वापस आ गए हैं।

सिंगाही थाने के बथुआ टांडा गांव के आबिद बिलखते हुए बताते हैं कि काश उनका भाई अपने परिवार समेत बाहर मजदूरी करने न गया होता तो उसका घर न उजड़ता। आबिद ने बताया कि उनके भाई इश्तियाक का गांव में मनरेगा जाबकार्ड तो बना है, लेकिन गांव में नियमित काम नहीं मिलता है। इसी वजह से वह अक्सर अपना परिवार लेकर बाहर मजदूरी करने चला जाता है। हादसे में जख्मी इश्तियाक की आंखें बार-बार भीगती हैं। वह भरे गले से बताता है कि उसको क्या पता था कि इस बार उसकी गृहस्थी ही उजड़ जाएगी। इश्तियाक ने बताया कि इस बार अक्टूबर में वह परिवार के अन्य सदस्यों सहित अपनी तीस वर्षीया पत्नी शबीना और बच्चों को साथ लेकर गन्ना छिलाई करने मेरठ चला गया था। गन्ने का सीजन खत्म होने पर वापस आते समय गजरौला के पास हुए हादसे में उसकी दुनिया उजड़ गई।

यही हाल नौरंगाबाद गांव के धर्मेंद्र के घर था। उसकी दस साल की बेटी रेशमा की जान इस हादसे में चली गई थी। पोस्टमार्टम के बाद शनिवार को रेशमा की लाश वापस आने पर पूरा घर बिलख पड़ा। दादी की खास लाड़ली रेशमा की दादी जगराना तो रेशमा की मौत की खबर सुनने के बाद से ही मानो पागल हुई जा रही है। वह बार-बार यही चीखती है कि धर्मेंद्र और उसकी पत्नी रेशमा को वहां न ले गए होते। शनिवार को दोनों गांवों में शवों का अंतिम संस्कार करते समय असमय हुई मौतों पर लोगों की आंखें नम थीं।

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