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लखीमपुरखीरी

खीरी के 51 गांवों पर छाया बाढ़ का खतरा, भीरा में बंधा कटा

हिन्दुस्तान टीम,लखीमपुरखीरीPublished By: Newswrap
Wed, 01 Sep 2021 03:42 AM
सोमवार को उत्तराखंड में कई स्थानों पर बादल फटने के कारण खीरी में शारदा नदी के बढ़ने का खतरा उत्पन्न हो गया है। सोमवार रात बनबसा बैराज से साढ़े तीन लाख...
1 / 2सोमवार को उत्तराखंड में कई स्थानों पर बादल फटने के कारण खीरी में शारदा नदी के बढ़ने का खतरा उत्पन्न हो गया है। सोमवार रात बनबसा बैराज से साढ़े तीन लाख...
सोमवार को उत्तराखंड में कई स्थानों पर बादल फटने के कारण खीरी में शारदा नदी के बढ़ने का खतरा उत्पन्न हो गया है। सोमवार रात बनबसा बैराज से साढ़े तीन लाख...
2 / 2सोमवार को उत्तराखंड में कई स्थानों पर बादल फटने के कारण खीरी में शारदा नदी के बढ़ने का खतरा उत्पन्न हो गया है। सोमवार रात बनबसा बैराज से साढ़े तीन लाख...

लखीमपुर-खीरी।

सोमवार को उत्तराखंड में कई स्थानों पर बादल फटने के कारण खीरी में शारदा नदी के बढ़ने का खतरा उत्पन्न हो गया है। सोमवार रात बनबसा बैराज से साढ़े तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। जो मंगलवार को खीरी पहुंचने लगा। इस बाढ़ से जिले के 51 गांवों पर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। डीएम ने इन गांवों को अलर्ट कर निचले भूस्तर वाले गांवों को खाली कराने के निर्देश दिए हैं। बाढ़ की त्रासदी उन हालातों में ज्यादा गम्भीर हो जाती है। जब यहां पहले से आई बाढ़ और भारी बरसात के चलते गांव जलमग्न हैं।

डीएम डॉ. अरविंद चौरसिया ने बताया कि बैराज बनबसा से शारदा नदी में 1,85,450 क्यूसेक पानी प्रवाहित हो रहा है। जबकि घाघरा बैराज से 1,70 ,505 क्यूसेक पानी प्रवाहित हो रहा है। जिले में लगातार बारिश व अब बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद जिले में बाढ़ की स्थिति बन गई है। पलिया, निघासन, धौरहरा और सदर तहसीलों के 51 गांव चिन्हित किए गए हैं। जहां बाढ़ की स्थितियां गम्भीर हो सकती हैं। जिस वजह से आगामी 72 घंटे तक सजगता और सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। डीएम ने अधीनस्थ अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि निचले भू स्तर वाले इलाके खाली करा लिए जाएं। साथ ही डूब क्षेत्र के चिन्हित गांवों में बाढ़ की मुनादी करा दी जाए। डीएम ने सभी अधिकारियों को अपने अधीनस्थ स्टाफ सहित अलर्ट मोड में रहने के आदेश दिए हैं। डीएम ने कहा है कि शारदा की बाढ़ से प्रभावित होने वाले ग्राम वासियों को रात्रि में ना सोने एवं मवेशियों को खुले व ऊंचे स्थानों पर शिफ्ट करने के लिए सतर्क करने को कहा है।

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कागजों पर अलर्ट और मुसीबत में ग्रामीण

-बाढ़ का अलर्ट कागजों तक ही सीमित रह। न मुनादी हुई और न ही अफसरों ने सतर्कता अभियान चलाया। नदी किनारे बसे गांवों में लोगों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। बाढ़ का लगातार प्रकोप झेल रहे ग्रामीणों को आपात स्थिति में बाढ़ राहत चौकियों तक पहुंचना आसान नहीं है। कई किलोमीटर पानी मे सफर कर बाढ़ राहत चौकियों तक जहां ग्रामीणों के लिए पहुंचना मुश्किल है। वहीं अधिकारियों को भी बाढ़ग्रस्त गांवों तक पहुंचने में नाकों चने चबाने पड़ेंगे। नदियों की तलहटी के गांव पहले से ही जलमग्न हैं। अब सम्भावित बाढ़ से निपट पाना आसान न होगा। जिले की तमाम बाढ़ राहत चौकियों पर सन्नाटा पसरा रहता है। एलर्ट घोषित होने के बावजूद भी अफसर बाढ़ राहत चौकियों तक नहीं जा रहे हैं। जिस वजह से प्रभावित गांवों के लोग वक़्ती सहायता से वंचित रह जाते हैं।

शारदा के बढ़े जलस्तर से कटा बझेड़ा गांव का बंधा

भानपुर खीरी।

बिजुआ ब्लॉक के तराई में बसे बझेड़ा के पास कल रात अचानक शारदा नहर का बंधा फट जाने से ग्रामीण भयभीत हो गये। सैकड़ों एकड़ किसानों की जमीन जलमग्न हो गई है। वहीं ग्रामीणों को बाढ़ की भी चिंता सताने लगी है।

पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही बारिश व उत्तराखंड में बादल फटने से शारदा नदी में एकदम उफान आ गया है। जिसके चलते बीते सोमवार को बझेड़ा के पास बना बंधा कट गया, जो धीरे-धीरे लगभग 25 से 30 मीटर तक बंधा कटता गया। नदी का तेज प्रवाह देखकर ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। खबर मिलते ही मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने डेरा जमा लिया है। साथ ही मौके पर तहसीलदार गोला व भीरा कोतवाल अजय राय भी मौके पर पहुंच गये। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने भी पहुंचकर कटान का आंकलन किया। सोमवार की रात भी काम के दौरान अचानक बझेड़ा गांव के पास से निकली शारदा नदी का बंधा फट गया। चंद मिनट के अंदर पानी का बहाव गांव की तरफ पहुंच गया। देखते ही देखते आसपास के कई खेत जलमग्न हो गए। नदी की गर्जना सुनकर ग्रामीण भी जाग गए। यह देखकर गांव में अफरा-तफरी का माहौल हो गया।

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