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स्टार्ट हुई पर धरातल पर नहीं दौड़ सकी नए उद्योगों की रेल

स्टार्ट हुई पर धरातल पर नहीं दौड़ सकी नए उद्योगों की रेल

खीरी जिले में नए उद्योगों की रेल साल 2017 में स्टार्ट तो हुई पर यह धरातल पर दौड़ नहीं पाई। करीब छह महीने पहले लखनऊ में हुई इन्वेटर्स समिट से जिले में नए उद्योग लगने की उम्मीदें बढ़ीं पर फाइलों को ही इधर-उधर दौड़ाया गया। साल बीत गया लेकिन यह उद्योग धरातल पर नहीं आ सके। अगर यह उद्योग लग जाते तो तमाम युवाओं को रोजगार मिल सकता था। 169 करोड़ के पांच प्रोजेक्ट पर हालांकि काम चल रहा है। उम्मीद है कि नए साल में यह उद्योग शुरू हो जाएंगे।उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए केन्द्र सरकार ने जहां स्टार्टअप योजना की शुरुआत की वहीं कई अन्य योजनाएं भी आईं। प्रदेश सरकार ने उद्योगों को स्थापित करने के लिए इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया।

इसमें खीरी जिले में 169 करोड़ के पांच प्रोजेक्ट पास हुए। इन उद्योगों को स्थापित करने के लिए फाइलों को दौड़ाया जाने लगा। इसमें ऐरा शुगर मिल में आसवानी, जीवन ट्रेडर्स की ओर से वाशिंग पाउडर, बेकरी के अलावा प्लाईमाइका और आयुर्वेदिक हर्बल प्रोडक्ट शामिल हैं। इनको लगाने के लिए उद्यमियों में प्रयास किया, काम चल रहा है। उम्मीद है कि नए साल में यह सभी उद्योग चल जाएंगे। अगर सरकार की बात करें तो कई योजनाएं उद्योगों को चलाने के लिए चलाई जा रही हैं। जिला उद्योग केन्द्र से ओडीओपी (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) योजना चल रही है। इसमें थारू उत्पादों को शामिल किया गया है। इसके अलावा छोटे-छोटे कारोबारियों को बढ़ाने के लिए विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना चलाई है। बताते चलें कि खीरी जिले में दो दशक पहले तक क्रेशर उद्योग बड़े पैमाने पर चल रहा था। बाद में यह उद्योग धीरे-धीरे समाप्त होने के कगार पर पहुंच गया।

पिछले एक दशक में राइस मिलों,प्लाईवुड फैक्ट्रियों को छोड़कर नए उद्योग नहीं लग सके जिससे युवाओं को रोजगार मिल सके। प्रदेश सरकार ने अब नए उद्योगों को बढ़ावा देने पर गंभीरता से काम कर रही है। क्रेशर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए भी मानकों में छूट दी गई है।

मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना

मुख्यमंत्री युवा स्वराजगार योजना में उद्योगों के लिए 25 लाख रुपए का ऋण उद्योग कार्यालय से दिलाया जाता है। इस योजना में साल 2017 में 193 आवेदन विभाग को मिले। लेकिन इनमें से स्वीकृति 15 को ही मिल सकी। बाकी की फाइलें चल रही हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना में जिले का टारगेट 10 था इस पर भी काम चल रहा है इसमें भी 25 लाख रुपए का ऋण उद्योग शुरू करने के लिए दिलाया जाता है। लेकिन काम शुरू नहीं हो सका। बाक्सफाइल तैयार तो बैंक लगा रही अड़ंगा-सरकार का निर्देश है कि उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए 59 मिनट में ऋण स्वीकृत होना चाहिए। लेकिन जिले में इसका असर नहीं दिख रहा है। छोटे-छोटे नए कारोबार चलाने के लिए लोग आगे आ रहे हैं। जिला उद्योग केन्द्र, खादी ग्रामोद्योग आदि में आवेदन करके लोग ऋण दिलाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन बैंक समय से ऋण नहीं दे रही हैं। इससे योजनाओं को अमलीजामा पहनाने में वक्त लग जाता है। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना में जो फाइलें बैंकों को भेजी जा रही हैं बैंक उनको समय से स्वीकृति नहीं दे रही हैं। इससे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उपायुक्त जिला उद्योग केन्द्र एमके चौरिया ने बताया कि बैंकों से लगातार सम्पर्क किया जाता है। एलडीएम से भी वार्ता चल रही है। नए उद्योग लगेंगे तो तरक्क के साथ ही युवाओं को रोजगार भी मिलेगा।

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  • Web Title:Started rail tracks of new industries could not run on the ground