Satauti news in lakhimpur kheri - एसडीएम साहब! तार-तार हो रही धरोहर की अस्मिता DA Image

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एसडीएम साहब! तार-तार हो रही धरोहर की अस्मिता

एसडीएम साहब! तार-तार हो रही धरोहर की अस्मिता

शहर के पौराणिक सतौती सरोवर के साथ छेड़छांड़ की गई है। नए नजरी नक्शा में सतौती सरोवर का रकवा तीन एकड़ 59 डिस्मिल रह गया है। सतौती सरोवर के आस पास तालाबों के नम्बर भी पाटे जा चुके हैं फिर भी आप और आपके अधिकारी अनदेखी कर रहे हैं। ऐसे तो सतौती सरोवर का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। अलीगंज रोड से मध्य सड़क तक 106 फिट तक लोगों के मकान बने हैं। कुछ लोगों ने अलग से पटाई भी कर ली है। जिसका गाटा संख्या 2568 और 2567 है। सतौती सरोवर का गाटा संख्या 2560 है। वर्तमान समय में जिसका रकवा 3 एकड़ 59 डिस्मिल बताया जा रहा है। इसके आस पास ऐसी जमीनें हैं, जो हमेशा जलमग्न रहीं और तालाब में दर्ज भी हैं फिर भी उनकी पटाई कराकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को खुली चुनौती दी जा रही है। शिकायतों, ज्ञापनों के बाद भी प्रशासन द्वारा ध्यान न दिया जाना गंभीर मामला बनता जा रहा है। लोगों की प्रशासन की नियत पर शंका बन गई है कि प्रशासन की सांठगांठ से ही सतौती सरोवर और उसके आस पास तालाबों को पाटा जा रहा है।

मौके पर भी रकबा कम

चलो सतौती सरोवर के नए नक्शे को ही मान लें जिसका रकवा तीन एकड़ 59 डिस्मिल बताया जा रहा है। यह रकबा भी मौके पर बहुत कम है। इससे स्पष्ट हो गया है कि सतौती सरोवर को स्थानीय जनप्रतिनिधियों और तहसील के अधिकारियों की सह पर पाटा गया है। यही कारण है कि सबकुछ जानने के बाद भी एसडीएम, तहसीलदार, विधायक, सांसद सब कोई चुप्पी साधे हैं।

प्रशासन के रवैए से शहर के लोग नाराज

अलीगंज रोड के व्यापारी कपिल भसीन का कहना है कि जब सतौती सरोवर और उसके आस पास के नम्बर तालाब में दर्ज हैं तब उन्हें कैसे पाटा जा सकता है। अवैध कब्जेदारों पर तो कार्रवाई होनी चाहिए। व्यापारी हरिओम भसीन का कहना है कि हैरत की बात है सामाजिक संगठनों के ज्ञापन, शिकायतों के बाद भी प्रशासन का एक भी एक नुमाइंदा सतौती सरोवर पर देखने तक नहीं गया है।

ऐसे में पौराणिक और सरकारी धरोहरों की रक्षा मुश्किल हो जाएगी। पंजाबी महासभा के महामंत्री सुमित सेठी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन न कराने वाले अधिकारी पर भी कार्रवाई की जाए जिससे अधिकारी से लेकर आम जनता तक कोर्ट की अवमानना की हिम्मत न जुटा सके। सामाजिक कार्यकर्ता महेश पटवारी का कहना है कि यह कतई सम्भव नहीं है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की सहमति के बिना नगर पालिका की बगैर सांठगांठ 15 एकड़ से ज्यादा बड़े तालाब की जमीन पर अवैध कब्जा हो जाए। इतना शोर मचने के बाद भी सब कान में तेल डाले हैं इससे सबकुछ साफ हो जाता है। उन्होंने कहा कि सतौती की जमीन पर अवैध कब्जा कर बनाए गए मकानों का आखिर दाखिल खारिज कैसे हो गया।

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