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और जब यूं रास्ते में मिल गई बहन, बंध गई राखी

और जब यूं रास्ते में मिल गई बहन, बंध गई राखी

भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के त्योहार रक्षाबंधन को एक बहन ने बखूबी निभाया जिसके गवाह तमाम अपिरिचित लोग बने। हुआ यह कि चारबाग डिपो की रोडवेज बस का चालक देहरादून से रक्षाबंधन के त्योहार पर सवारियां भरकर लखनऊ निकला। गुरुवार सुबह जब चालक ने चाय नास्ते के लिए मैगलगंज कस्बे के होटल पर बस रोकी तो बस की सवारियों व बस स्टाफ में बातचीत होने लगी कि रक्षाबंधन पर अपने घर पहुंच बहन से राखी बंधवा पाने का मौका सबको कहां नसीब हो पाता है।

बस चालक शिवदास निवासी भौलिया थाना असोहा जनपद उन्नाव ने बड़ी उदासी के साथ कहा कि अभी उसे बस चारबाग डिपो लखनऊ तक ले जानी है। उसके बाद ड्यूटी आफ करते करते शाम हो जाएगी। घर पहुंचते पहुंचते काफी देर हो जाएगी पता नहीं उसे बहन से राखी बंधवाने का मौका मिल पाएगा या नहीं। चालक शिवदास की यह बात बस में सफर कर रही बक्शी तालाब लखनऊ निवासी किरण के कानों में पड़ी तो उसने बस चालक को अपना भाई बनाते हुए चालक सीट पर बैठे शिवदास की कलाई में पवित्र रक्षा सूत्र बांध दिया। चालक शिवदास ने भी किरण को बहन मानते हुए उसके सिर पर हाथ रखकर भाई होने का फर्ज अदा करने का वादा किया। एक क्षण में बने भाई-बहन के इस रिश्ते के गवाह बने बस में सवार यात्रियों ने किरन की जमकर तारीफ की व बस लखनऊ के लिए रवाना हो गई।

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  • Web Title:rakshabandhan in lakhimpur kheri