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भारत के खाते में दर्ज सबसे बड़े विश्व रिकार्ड को तोड़कर इसका दायरा और बड़ा करने की तैयारी चल रही है। पहले यह रिकार्ड गाजियाबाद के दादरी में बना था और अब खीरी जिले के छोटी काशी के नाम से मशहूर गोलागोकर्णनाथ में बनने जा रहा है। दादरी गाजियाबाद में बने विश्व के 102 घंटे के सबसे लंबे वक्त के मुशायरा व कवि सम्मेलन का दायरा बढ़ाकर इसको 121 घंटे का करने की तैयारी है। दो अप्रैल से गोला के शहनाई गेस्ट हाउस में इसकी शुरुआत होगी। इस अनोखे कार्यक्रम में 310 कवि और शायर काव्य पाठ करेंगे। सात अप्रैल तक चलने वाले कवि सम्मेलन व मुशायरे में विश्व रिकॉर्ड बनेगा।
लॉन्गेस्ट मैराथन कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का यह आयोजन कपिलश फाउंडेशन कर रहा है। फाउंडेशन की संयोजक शिप्रा खरे और कई विश्व रिकॉर्ड विजेता यतीश शुक्ला ने बनने जा रहे इस विश्वरिकार्ड के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि इसके लिए साहित्यकार संपर्क यात्रा 35 दिन तक चलाई गई। इसमें लखनऊ, पीलीभीत, शाहजहांपुर, बंडा, हरदोई,सीतापुर, बहराइच, बदायूं, आदि जिलों की यात्रा की गई और साहित्यकारों से सम्पर्क किया गया। लगातार 121 घंटे से अधिक समय तक चलने वाले कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का विश्व रिकॉर्ड कार्यक्रम दो अप्रैल से सात अप्रैल 2021 तक छोटी काशी गोला के शहनाई गेस्ट हाउस में होना है। इस कार्यक्रम की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई है। इसमें पूरे देश से कवि, कवियित्री व शायर भाग लेंगे। 7260 मिनट से अधिक चलने वाले कार्यक्रम में प्रत्येक रचनाकर को अधिकतम 20 मिनट मिलेंगे।
किसी प्रकार की कोई दिक्कत न हो इसके लिए कवियों के तीस स्लाट बनाए गए हैं। काव्य पाठ करने वाले कवि को अपने शब्दों के उच्चारण में 30 सेकेन्ड से भी कम का गैप रखना होगा। विश्व रिकार्ड बनाने को नानक चंद वर्मा, श्रीकांत तिवारी, संत कुमार बाजपेई, रमेश चन्द्र पाण्डे, संजीव दीक्षित, आलोक तिवारी, अभिषेक निष्कर्ष, कृष्णा तिवारी, तैयारी में जुटे हैं। प्रेसवार्ता को कपिलश के संरक्षक ज्ञान स्वरूप शुक्ल, डॉ. वीबी धुरिया, अर्येन्द्र पाल सिंह, आशीष अनल, श्रीकांत तिवारी कांत, कमलेश धुरंधर ने भी संबोधित किया।
घर बैठे बन सकेंगे इस विश्वरिकार्ड के साक्षी
कोरोना काल को देखते हुए कोविड-19 की गाइड लाइन का पालन भी कराया जाएगा। इसको लेकर तैयारियां कर ली गई हैं। आयोजन स्थल पर सेनेटाइजिंग की पूरी व्यवस्था रहेगी। बिना मास्क के कोई नहीं जा सकेगा। खास बात यह है कि अगर कोई नहीं जा पा रहा है तो उसके लिए इस विश्वरिकार्ड का साक्षी बनने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था की गई है। पूरे कार्यक्रम का प्रसारण छोटी काशी नाम से बनाए गए ऐप से किया जाएगा। यह एप प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है। इसके अलावा फेसबुक, यू ट्यूब से भी प्रसारण किया जाएगा।
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