Political and government alliance ends in Satyaki - सियासी और सरकारी गठजोड़ में खत्म हो रही सतौती DA Image

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सियासी और सरकारी गठजोड़ में खत्म हो रही सतौती

सियासी और सरकारी गठजोड़ में खत्म हो रही सतौती

अफसर, नेता और भू माफियाओं का गठजोड़ शहर की पौराणिक धरोहर सतौती सरोवर को खत्म कर रहा है। जिम्मेदार, समाज के ठेकेदार भी अभी चुप्पी साधे हैं। हैरत की बात है कि गठजोड़ इतना मजबूत है कि कार्रवाई तो दूर प्लाटिंग बेखौफ चल रही है। प्रशासन ने मानो कसम खा रखी है कि चाहें कुछ हो जाए, सतौती की ओर निगाह डालनी ही नहीं है।

भगवान भोलेनाथ की नगरी छोटी काशी में पौराणिक चीजों पर भी डाका पड़ रहा है। अफसर, नेता और भू माफियाओं का गठजोड़ इतना मजबूत हो गया है कि शहर में अब सरकारी जमीन खाली नहीं मिलेगी। तमाम जगह वैसे भी तालाबों पर पटाई चल रही है। कुछ पूंछने पर अफसर कन्नी काट जाते हैं। नेता चुप्पी साध जाते हैं इससे भू माफियाओं की पौ बारह हो रही है। हैरान करने वाली बात है कि जब कई संगठनों ने तहसील के अधिकारियों को ज्ञापन दिए। नेताओं के पास गुहार लगाई। तब आखिर कैसे सम्भव है कि उन्हें अवैध कब्जे की जानकारी नहीं है। ऐसा माहौल बनता जा रहा है कि इस गठजोड़ में जो शामिल हो जाए उसे शहर में सरकारी जमीन पर कब्जे से कोई रोक नहीं पाएगा।

किसने किया नक्शे पर खेल

पुराने नक्शे में खेल होने के बाद जो नया नक्शा बना है उसमें भी गाटा संख्या 2560 सतौती सरोवर दर्शाया गया है जिसका रकवा तीन एकड़ 59 डिस्मिल बताया जा रहा है। नगर पालिका को सरोवर की जितनी जमीन पर सौन्दर्यीकरण कराना है पालिकाध्यक्ष के अनुसार वह जमीन चार एकड़ छह डिस्मिल है। चलो यह भी मान लिया जाए फिर भी मौके पर इतनी बची ही नहीं है। हर रोज पटाई हो रही है। मजे की बात तो यह है कि जो सतौती सरोवर लोगों की आस्था का केन्द्र है शासन और नेता उसे खत्म कराने पर तुले हैं। प्लाटिंग के बाद अब वहां नई स्कीम पर काम शुरू हो गया है। यह कहना कतई गलत नहीं होगा कि भाजपा शासनकाल में सतौती सरोवर को ग्रहण लग गया है।

एसडीएम सुनंदू सुधाकरन की सुनिए

सवाल-सतौती पर कब्जे की लगातार शिकायतें आ रही हैं। प्रशासन वहां गया भी नहीं जांच करने, ऐसा क्यों?

-जब मैं गोला आया तभी लोगों ने शिकायत की थी तो मैंने सतौती की पैमाइश कराई थी। वहां कब्जे जैसी कोई चीज नहीं है।

सवाल-किसने पैमाइश की और कितना रकबा है सतौती सरोवर का?

-सतौती की पैमाइश मैंने अकेले नहीं कराई, हरदोई में जहां राजस्व विभाग के कर्मचारियों की ट्रेनिंग होती है, वहां से निदेशक आए थे और उन्होंने तकनीकी स्तर पर सतौती की पैमाइश की है। यह कहना गलत है कि प्रशासन ने पैमाइश नहीं कराई है।

सवाल-तो क्या तालाब पाटा जा सकता है? उस पर प्लाटिंग हो सकती है?

-तालाब पाटा ही नहीं जा रहा है। आपको किसी ने गलत सूचना दी होगी। हमारा जितना तालाब है, उस पर हमारा कब्जा सुरक्षित है। जो लोग वहां पटान कर रहे हैं, वह हमारा क्षेत्र है ही नहीं। वह प्राइवेट लोगों की जमीन है। वहीं प्लाटिंग हो रही है। प्रशासन को इससे कोई मतलब नहीं है। हम सरोवर पर कब्जा नहीं होने देंगे।

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