Nothing at bed in the Nutrition Rehabilitation Center the question of eradication of malnutrition - पोषण पुनर्वास केन्द्र में बेड खाली, कुपोषण मिटाने पर सवाल DA Image
11 दिसंबर, 2019|10:21|IST

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पोषण पुनर्वास केन्द्र में बेड खाली, कुपोषण मिटाने पर सवाल

पोषण पुनर्वास केन्द्र में बेड खाली, कुपोषण मिटाने पर सवाल

केंद्र और राज्य सरकार के पूरा जोर लगाने के बाद भी खीरी में अतिकुपोषित बच्चों का ग्राफ कम होने का नाम नही ले रहा है। पोषण पुनर्वास केंद्र में 12 बच्चों को भर्ती करी इलाज किया जा रहा है। इसके बाद भी पांच बेड खाली ही रह रहे हैं। अतिकुपोषित बच्चों को यहां लाए जाने की व्यवस्था है। लेकिन बच्चे यहां नहीं लाए जा रहे हैं। बच्चे लाने की जिम्मेदारी कार्यक्रम विभाग की है पर विभाग के जिम्मेदार मनमानी कर रहे हैं।

जिला अस्पताल में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र में मौजूदा समय में 12 बच्चों को भर्ती कर सुपोषित किया जा रहा है। पोषण पुनर्वास केंद्र में दस बेड के अलावा पांच अतिरिक्त बेड की भी सुविधा है। इसके बाद भी जिले में लगभग 53 हजार से अधिक बच्चे अतिकुपोषित होने के बाद भी बेड खाली ही रह रहे है। इसके पीछे वजह यह है कि गांव स्तर पर आशा और आंगनबाड़ी के साथ ही आरबीएसके की टीम भी इन बच्चों को केंद्र तक ला पाने में सफल नहीं हो पा रही है। इसके साथ ही जिम्मेदार अधिकारी भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे है।

बीते साल 204, अभी तक 110 बच्चे भर्ती

पोषण पुनर्वास केंद्र में बीते 2018 में कुल 204 अतिकुपोषित बच्चों को भर्ती किया गया था। इस बार छह माह गुजर जानें के बाद इनकी संख्या 110 ही पहुंच सकी है। इसमें जनवरी में 15,फरवरी में 13, मार्च में 12, अप्रेल में 15, मई में 24 और जून में 31 बच्चों को भर्ती किया गया है।

खुद आने वालों बच्चों से कम आशा ला रही बच्चे

अतिकुपोषित बच्चों की निगरानी रखने और इनको पोषण पुनर्वास केंद्र लाने की जिम्मेदारी आशा बहूओ, आंगनबाड़ी और आरबीएसके की टीम को है। इसके बाद भी इन बच्चों को लाने के मामले में आशा बहू काफी पीछे रह रही है। वर्ष 2018 का आंकड़े में आंगनबाड़ी- 82, आशा-13, आरबीएसके-28, अपने आप पहुंचे-17 बच्चे।

ऐसे होती है अतिकुपोषित बच्चों की पहचान

अतिकुपोषित की पहचान माक टेप्स मघ्य ऊपरी भुजा की माप से होती है। भुजा की माप 11.5 होने पर बच्चा अतिकुपोषित होता है। 11.5 से 12.4 सेंटीमीटर होने पर कुपोषित और 12.5 सेंटीमीटर होने पर सामान्य श्रेणी में आता है।

यह मिलती है सुविधा

अतिकुपोषित बच्चे को 14 दिन तक भर्ती रखा जाता है। इस दौरान बच्चे के साथ आए एक परिवार के सदस्य को खाना की सुविधा के साथ ही 100 रुपए रोजाना दिया जाता है। आशा को प्रति बच्चा 50 रुपए मिलता है।

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