DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

खीरी सीट पर फिर लड़खड़ाई परिवार का विरासत

खीरी सीट पर फिर लड़खड़ाई परिवार का विरासत

खीरी सीट पर एक ही परिवार में लगातार 10 बार सांसदी रही। पिछले दो चुनावों से यह विरासत ऐसी लड़खड़ाई कि अब तीसरी पीढ़ी की प्रत्याशी डॉ. पूर्वी वर्मा भी इसको आगे नहीं बढ़ा सकीं। खीरी से गठबंधन प्रत्याशी डॉ.पूर्वी वर्मा परिवार की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए मैदान में उतरी थी, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले उनके पिता सपा के राष्ट्रीय महासचिव व राज्य सभा सांसद रवि प्रकाश वर्मा दो चुनाव हार चुके हैं।

गोला में रहने वाली डॉ.पूर्वी वर्मा खीरी सीट से गठबंधन प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में पहली बार उतरी थी। सपा के राष्ट्रीय महासचिव व राज्य सभा सांसद रवि प्रकाश वर्मा की बेटी डॉ. पूर्वी वर्मा परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे ले जाने के लिए चुनाव मैदान में आई थी। बताते चलें कि खीरी संसदीय सीट से गठबंधन प्रत्याशी डॉ.पूर्वी वर्मा के दादा स्व.बालगोविन्द वर्मा चार बार सांसद रहे। इसके बाद उनकी दादी स्व. ऊषा वर्मा लगातार तीन बार चुनाव जीतकर संसद तक पहुंची। परिवार की इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए रवि प्रकाश वर्मा चुनाव मैदान में उतरे और उन्होंने लगातार तीन बार जीत हासिल की।

सपा के राष्ट्रीय महासचिव रवि प्रकाश वर्मा सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के खास हैं। वर्ष 2009 के चुनाव में रवि वर्मा को कांग्रेस प्रत्याशी से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 2014 के चुनाव में भी वह हारे और भाजपा के अजय मिश्र टेनी चुनाव जीते। लगातार दो चुनाव हारने के बाद रवि प्रकाश वर्मा सपा से राज्य सभा सांसद बने। 2019 के चुनाव में परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए रवि प्रकाश वर्मा की बेटी डॉ.पूर्वी वर्मा को सपा ने टिकट दिया। सपा बसपा गठबंधन में यह सीट सपा के खाते में आई। पहली बार चुनाव मैदान में उतरी डॉ.पूर्वी वर्मा को हार का सामना करना पड़ा।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Lok sabha election Result 2019 Live update