कॉरपोरेट परस्त नीतियां मजदूरों को बना रही गुलाम
16 अप्रैल को समाजवादी मजदूर सभा ने नोएडा में 13-14 अप्रैल की घटना के संबंध में ज्ञापन सौंपा। इसमें न्यूनतम मासिक वेतन 20,000 रुपये, गिरफ्तार मजदूरों की रिहाई, न्यायिक जांच और पुलिस उत्पीड़न पर रोक लगाने की मांग की गई। श्रमिकों का शोषण और बेरोजगारी की समस्या पर चिंता जताई गई।
16 अप्रैल को समाजवादी मजदूर सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेंद्र कुमार के नेतृत्व में राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सहायक श्रम आयुक्त को सौंपा गया। ज्ञापन नोएडा में 13 व 14 अप्रैल को नोयडा में हुई घटना से संबंधित है। ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने कई महत्वपूर्ण मांगें उठाईं है। इनमें प्रमुख रूप से अकुशल मजदूरों के लिए न्यूनतम मासिक वेतन 20 हजार करने की मांग की गई। साथ ही, घटना के दौरान गिरफ्तार किए गए सभी मजदूरों, कार्यकर्ताओं व पत्रकारों की तत्काल रिहाई की जाए और उनका उत्पीड़न बंद हो। 13 व 14 अप्रैल को नोयडा में हुई घटना की न्यायिक जांच कराने, दोषी प्रबंधकों व अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज हो।
पुलिसिया उत्पीड़न पर तत्काल रोक लगाई जाए। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि आंदोलनरत मनरेगा कर्मियों का बकाया भुगतान तत्काल किया जाए तथा उनकी सभी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाए। सरकार पूंजीवादी कानूनों के माध्यम से श्रमिकों का शोषण कर रही है और सस्ती मजदूरी का रास्ता खोल रही है, जिससे देश की विशाल श्रमिक आबादी प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि इन नीतियों के कारण बेरोजगारी की समस्या और भी भयावह होती जा रही है। इस मौके पर सरदार हरजीत सिंह, यदुवेंद्र वर्मा ‘पम्मू’,रियाजुल्ला खान, अनुपम वर्मा, भूपेंद्र सिंह ‘अन्नू’, सुधीर यादव, अनीता, गीता देवी, माधुरी, सूफिया, साबिर अली, सचिन, अशफाक अंसारी, जितेंद्र, श्रीराम, नीरज रस्तोगी, शीबू अंसारी एवं फुरकान सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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