Lakhimpur Khiri News: बैराज से पानी छोड़े जाने पर फिर उफनाईं नदियां, बाढ़ का बढ़ा खतरा
Lakhimpur Khiri News: लखीमपुर में तीन दिनों की मूसलाधार बारिश और बनबसा बैराज से पानी छोड़ने के कारण शारदा और मोहाना नदी में जलस्तर बढ़ गया है। शारदा नदी खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है और मोहाना नदी भी उफान पर है, जिससे बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। ग्रामीण सुरक्षित स्थान की तलाश में जुटे हैं।

Lakhimpur Khiri News: लखीमपुर। बीते तीन दिनों से रुक-रुक कर हो रही मूसलाधार बारिश और बनबसा बैराज से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण क्षेत्र की प्रमुख नदियां एक बार फिर उफान पर आ गई हैं। शारदा और मोहाना नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने से तराई और तटवर्ती इलाकों में बाढ़ और कटान का खतरा गहरा गया है। बनबसा बैराज से 56 हजार क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किए जाने और पिछले 24 घंटों में हुई लगभग 35 मिलीमीटर बारिश के चलते शारदा नदी अब खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच गई है। आंकड़ों के अनुसार, पलिया पुल के पास शारदा नदी का जलस्तर बढ़कर 154.18 मीटर दर्ज किया गया है, जबकि यहां खतरे का निशान 154.59 मीटर पर स्थित है। नदी खतरे के निशान से महज 0.41 मीटर नीचे बह रही है और जलस्तर में लगातार वृद्धि का रुख बना हुआ है। यदि पहाड़ों पर बारिश का सिलसिला जारी रहा और बैराज से पानी का डिस्चार्ज और बढ़ाया गया, तो देर रात तक शारदा नदी लाल निशान को पार कर सकती है। शारदा के साथ-साथ नेपाल से होकर आने वाली सीमावर्ती मोहाना नदी का रुख भी आक्रामक हो गया है। मोहाना नदी के उफान पर आने से भारत-नेपाल सीमा से सटे दर्जनों गांवों पर बाढ़ का सीधा संकट मंडराने लगा है। नदी की तेज धारा ने किनारे के उपजाऊ खेतों और तटबंधों का कटान शुरू कर दिया है। इससे किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न होने की कगार पर है और कई ग्रामीण अपनी बस्तियों के कटान की जद में आने की आशंका से भयभीत हैं।
तटवर्ती गांवों में बढ़ी ग्रामीणों की चिंता
-नदियों के रौद्र रूप को देखते हुए नदी किनारे बसे मजरा और गांवों के बाशिंदों की चिंताएं बढ़ गई हैं। पिछले वर्षों में आई विनाशकारी बाढ़ का दंश झेल चुके ग्रामीणों ने सुरक्षित स्थानों की तलाश शुरू कर दी है। लोग अपने मवेशियों, जरूरी सामान और अनाज को ऊंचे स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी में जुट गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जलस्तर इसी रफ्तार से बढ़ता रहा, तो कई संपर्क मार्गों पर पानी चढ़ जाएगा, जिससे उनका मुख्य कस्बों से संपर्क टूट सकता है।
प्रशासन ने तेज की निगरानी
-बाढ़ की बढ़ती आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। संबंधित तहसील और विकास खंड स्तर के अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। सभी बाढ़ चौकियों को 24 घंटे सक्रिय रहने और नदी के जलस्तर पर लगातार नजर बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। राजस्व कर्मियों और लेखपालों को संवेदनशील गांवों में स्थिति पर नजर रखने के लिए तैनात किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि आपात स्थिति से निपटने के लिए नावों, राहत सामग्री और सुरक्षित आश्रय स्थलों की व्यवस्था की जा रही है, ताकि जलस्तर बढ़ने पर तत्काल राहत कार्य शुरू किया जा सके।


