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लखीमपुरखीरीरोजी-रोटी को तरस रहे वित्तविहीन शिक्षक

हिन्दुस्तान टीम,लखीमपुरखीरीPublished By: Newswrap
Mon, 24 May 2021 11:31 PM
रोजी-रोटी को तरस रहे वित्तविहीन शिक्षक

गोला गोकर्णनाथ खीरी।

महामारी के दौर में सबसे उपेक्षित वित्तविहीन शिक्षक का दर्द कोई समझने वाला नहीं है। उसके आगे रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

वित्तविहीन शिक्षकों का कहना है कि सरकार ने अभी तक पता नहीं वित्तविहीन शिक्षकों के लिए कुछ क्यों नहीं किया जबकि पटरी दुकानदारों, रेहड़ी वालों, मोची, धोबी आदि सभी के लिए कुछ न कुछ व्यवस्था की है ये वे लोग है जिनका धंधा-पानी चल ही रहा है। हर चीज महंगे दामों पर मिल रही है। सभी से मनमाने दाम वसूले जा रहे है जबकि सच्चाई ये है की आज के दौर में सबसे दयनीय स्थिति वित्तविहीन शिक्षकों की है। जिसके लिए सरकार ने एक शब्द तक नहीं कहा न ही उनकी आर्थिक स्थिति के बारे में कोई चर्चा हो रही है।

कोरोना महामारी ने जहां सबकी कमरतोड़ दी है। वहीं वित्तविहीन शिक्षकों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। इस कठिन दौर में वे अपना व अपने परिवार का भरण-पोषण कैसे करेंगे। यह कोई अन्य काम भी अब नहीं कर सकते अभी पहली कोरोना मार से उबर भी नहीं पाए थे की दूसरी मार आ गयी, जिसमें बिलकुल धरशाई हो गए और अभी कुछ पता नहीं की स्कूल कब खुलेंगे और खुलेंगे भी तो क्या मानक रहेगा। ऐसे में सभी शिक्षकों का भला नहीं हो पायेगा। अब सरकार को और वित्तविहीन संगठन के पदाधिकारियों को इनकी सुधि लेनी चाहिए। ये तो केवल कहने की बात है कि इनहे कोई मानदेय मिल पायेगा। सरकार को भी समय रहते कोई ठोस कार्ययोजना बनानी होगी अन्यथा स्थिति भयावह होने की बात से इंकार नहीं किया जा सकता। बच्चों व शिक्षकों का प्राथमिकता के तौर पर टीकाकरण किया जाये। विद्यालयों व वहां के पूरे स्टाफ की क्षतिपूर्ति के लिए कोई ठोस योजना बनाए जाने की जरूरत है।

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