
खनन पट्टा निरस्त कराने की मांग को लेकर धरने पर बैठे लोग
Lakhimpur-khiri News - मांझा गांव के पास जौरहा नाले पर खनन विभाग द्वारा खनन पट्टा आवंटित करने के खिलाफ किसान और सिख संगठन ने धरना दिया। ठंड में टेंट लगाकर बैठने वाले ये लोग खनन पट्टा निरस्त करने की मांग कर रहे हैं। इलाके में पहले हुए खनन से कई घर कट चुके हैं। किसान अनिश्चितकाल तक धरने पर रहेंगे।
मांझा गांव के पास बह रहे जौरहा नाले पर खनन विभाग द्वारा खनन के ठेकदार को खनन पट्टा आवंटित किए जाने के विरोध में किसान संगठन व सिख संगठन के लोग भीषण सर्दी में नाले के किनारे टेंट लगाकर धरने पर बैठ गए। ये लोग खनन पट्टा निरस्त करने की मांग कर रहे हैं। इस इलाके से गुजरी जौरहा नदी अभिलेखों में नाला दर्ज है। इसमें खनन विभाग ने कुछ महीने पहले ठेकेदारों को खनन पट्टा जारी कर दिया है। ठेकेदार ने रेत निकाल कर लंबा चक्कर लगाने की बजाए छोटे रास्ते से नाले के भीतर होम पाइप डालकर अस्थाई पुल बना दिया है।
इसका इलाके के किसान और सिख संगठन के लोग विरोध कर रहे हैं। लगातार विरोध के बाद शुक्रवार को ठंड में टेंट लगाकर धरने पर बैठे गए और वहीं पर लंगर भी लगाया। मांझा गांव के किसान परमजीत सिंह पम्मी ने बताया कि खनन विभाग के द्वारा नियमों को दरकिनार कर जौरहा नाले की गाटा संख्या 947 पर खनन का पट्टा आवंटित किया गया है। इससे पहले इसी नाले पर हुए खनन से करीब आधा दर्जन घर कट गए थे। अब पुनः खनन विभाग ने खनन का पट्टा आवंटित किया गया है, जिससे आसपास किसानों की जमीने कटान की चपेट में आ गई हैं। खनन विभाग के ठेकेदार द्वारा बालू तौलने के लिए पीडब्ल्यूडी मार्ग के किनारे कांटा भी लगाया गया। वहीं बिजली विभाग ने ट्रांसफार्मर लगाकर कनेक्शन भी दे दिया है। स्थानीय किसान मामले को लेकर डीएम से दो बार मिल चुके हैं। डीएम द्वारा गठित जांच टीम दो बार मौके पर पहुंची है। लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला और न ही जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की गई। किसानों का कहना है कि जब तक खनन पट्टा निरस्त नहीं किया जाता, तब तक वह अनिश्चितकाल के लिए यहीं पर धरने पर बैठे रहेंगे।

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