इको टूरिज्म के साथ अब धार्मिक पर्यटन पर भी जोर, महाभारत कालीन मंदिरों की बदलेगी सूरत
Lakhimpur-khiri News - जिला खीरी के दुधवा टाइगर रिजर्व में अब धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है। महाभारत कालीन मंदिरों के विकास के लिए 111 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। इसके अलावा अन्य प्राचीन स्थानों के लिए भी धनराशि निर्धारित की गई है ताकि श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं बढ़ाई जा सकें।

जिला खीरी में दुधवा टाइगर रिजर्व में इको टूरिज्म के साथ ही धार्मिक पर्यटन को भी अब बढ़ावा दिया जाएगा। पर्यटन विभाग जिले में महाभारत कालीन मंदिरों को और चमकाएगा। वहां तक जाने वाले रास्तों को दुरुस्त किया जाएगा। साथ ही वहां सुविधाएं भी बढ़ाया जाना है। दुधवा के क्षेत्र में अब तक इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए काम हो रहा था। अब धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने का प्लान भी तैयार किया गया है और बजट भी जारी किया गया है। इसके लिए यूपीएसटीडीसी कार्यदायी संस्था को नामित किया गया है। मोहम्मदी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत महाभारत कालीन ओछवानाथ शिव मंदिर के पर्यटन विकास एवं सौन्दर्यीकरण के लिए 111 लाख रुपये का बजट जारी किया गया है।
महाभारत काल में यहां पांडवों ने अज्ञातवास बिताया था। अब तक यह मंदिर गुमनाम रहा है। इसके अलावा निघासन के ढखेरवा चौराहे के आगे अंतर्वेद नाम प्राचीन स्थान के पर्यटन विकास के लिए 81 लाख रूपये तय किए गए हैं। इस अंतर्वेद का भी महाभारतकालीन इतिहास है। वहीं गोला चौसन्दे बाबा स्थान के पर्यटन विकास के लिए 96 लाख रूपये की धनराशि स्वीकृत की गयी है। सदर क्षेत्र के अंतर्गत अटकोनवा में माता बेलहिया धाम के पर्यटन विकास के लिए 60 लाख रुपये, पलिया विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत सम्पूर्णा नगर में स्थित बालाजी मंदिर के पर्यटन विकास के लिए 20 लाख रूपये, वहीं प्राचीन देवकली तीर्थ मंदिर के पर्यटन विकास के लिए 70 लाख रुपये व कस्ता में स्थित बाबा गौरीशंकर बेहजम का पर्यटन विकास के लिए 45 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गयी है। इन क्षेत्रों के पर्यटन विकास के अंतर्गत सौन्दर्यीकरण के साथ ही श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाएं सुलभ कराने के लिए परियोजनाएं स्वीकृत की गई है।
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