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23 सितम्बर, 2020|2:33|IST

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33 साल के इतिहास में पहली बार इतने कम दिन खुला दुधवा

33 साल के इतिहास में पहली बार इतने कम दिन खुला दुधवा

दुधवा नेशनल पार्क के 33 साल के इतिहास में पहली बार पार्क का पर्यटन इतने कम दिन चल सका। 15 नम्बर 2019 से सैलानियों के लिये खोला गया दुधवा का शीतकालीन सत्र 2020 में पहले कई बार बारिश और फिर कोरोना वायरस की भेंट चढ़ गया। लॉक डाउन को लेकर पिछले करीब 40 दिनों से दुधवा सैलानियों के आवागमन से वीरान पड़ा हुआ है। आगे और कब तक वीरान रहेगा यह भविष्य के गर्भ में है।

उप्र का इकलौता दुधवा टाइगर रिजर्च 1958 में वन्यजीव अभयारण्य के रूप में स्थापित किया गया था। वर्ष 1977 में यह राष्ट्रीय उद्यान बना। वन्यजीव प्रेमी हुए बिली अर्जुन सिंह ने प्रयासों के बाद वर्ष 1987 से जंगल के दुर्लभ वन्यजीवों के दीदार के लिये पर्यटन सत्र का आगाज किया गया। यह संरक्षित क्षेत्र भारत और नेपाल की सीमाओं से लगे विशाल वन क्षेत्र में फैला है। यह उद्यान दो भागों में विभाजित है जिसमें पहला किशनपुर और दूसरा कतरनियाघाट।

दुर्लभ वन्यजीवों के दीदार करने के लिये साल दर साल दुधवा में सैलानियों की संख्या में इजाफा होता रहा है। लेकिन शीतकालीन सत्र 2019-20 दुधवा के 33 सालों के इतिहास में सबसे कम चलने वाला पर्यटन सत्र साबित हो रहा है। कोराना वायरस के दौरान चल रहा लॉक डाउन अभी इस इतिहास को और आगे ले जायेगा यह भविष्य के गर्भ में है।

दुधवा के क्यों दीवाने हैं सैलानीं

-दुधवा नेशनल पार्क की विशेषता यह है कि यहां के जंगलों में टाइगर, हाथी, बारहसिंघा, हिरण, राइनो और 450 तरह के पक्षी एक साथ विचरण करते हैं, जो कि बहुत कम सफारी पार्कों में देखने को मिलते हैं।

किशनपुर में वास करता है बाघों का कुनबा

दुधवा टाइगर रिजर्व में करीब 75 बाघ वास करते हैं लेकिन इन बाघों में आधे से अधिक बाघ किशनपुर रेंज में पाये जाते हैं। इसलिये दुधवा आने वाला पर्यटक बाघों के दीदार के लिये किशनपुर जरुर आना चाहता है।

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  • Web Title:Dudhwa opened for so few days for the first time in 33 years of history