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बीमारी से एक बच्चे की मौत, विभाग को रोग पता ही नहीं

बीमारी से एक बच्चे की मौत, विभाग को रोग पता ही नहीं

खमरिया इलाके में संक्रामक रोगों ने 24 घण्टों के भीतर दो मासूमों की जिंदगी निगल ली। कस्बे से सटी नई बस्ती में दो उल्टियां करने के चंद मिनट के भीतर एक मासूम मौत के मुंह में समा गया। जबकि कस्बे से ही सटे तमोलीपुरवा गांव में गले के संक्रमण का शिकार बालिका की मौत हो गई। खमरिया कस्बे से सटी नई बस्ती में रहने वाले नन्द कुमार दीक्षित का बेटा सुधाकर (08) घर के बाहर खेल रहा था। अचानक उसे उल्टियां होने लगीं। तो साथ खेल रहे बच्चों ने उसके घर सूचना दी। परिजनों ने सुधाकर को तत्काल नजदीकी डॉक्टर के यहां पहुंचाया।

मगर तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। इसके अलावा कस्बे से सटे तमोलीपुरवा गांव में रहने वाले बद्रीप्रसाद की पुत्री सोनम (13) को गले मे संक्रमण की शिकायत हुई। गांव में संक्रामक रोग फैलने की सूचना पर सीएमओ डॉ. मनोज अग्रवाल ने खुद सोनम की जांच की और संक्रमण की पुष्टि होने पर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया। जहां हालत बिगड़ने पर उसे बलरामपुर हॉस्पिटल लखनऊ रेफर किया गया। वहां भी उसकी हालत में सुधार न होने पर सोनम को राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उसकी हालत देख डॉक्टरों ने इलाज से हाथ खड़े कर दिए। निराश परिजन सोनम को बीती रात घर लाए। घर पहुंचने के कुछ देर बाद उसने दम तोड़ दिया।

आठ घण्टे बाद सोनम के जिस्म में हरकत से मची अफरा तफरी

तमोलीपुरवा गांव में सोनम की मौत अल सुबह करीब चार बजे हो गई। परिजनों ने अंतिम संस्कार की तैयारियां भी कर लीं। दफनाने के लिए शव को जिस वक्त नहलाया जा रहा था। तब सोनम के जिस्म में कुछ हरकत हुई। परिजनों का दावा है कि उसे पानी पिलाया गया तो वह भी हलक के नीचे उतर गया। इस पर सोनम के जीवित हो उठने की चर्चा हो गई। ग्रामीणों ने इसकी सूचना खमरिया सीएचसी पर दी। जहां से प्रभारी डॉ. बीके स्नेही,डॉ. हिफज़ुर्रह्मान,डॉ. हशमत आरा और डॉ. अश्विनी कुमार गांव पहुंचे। जिन्होंने सोनम का परीक्षण कर उसे मृत घोषित कर दिया। बावजूद इसके परिजन सोनम को जिंदा मानते रहे और तंत्र-मंत्र में उलझ गए। शाम तक उसका अंतिम संस्कार नहीं किया जा सका था।

क्या है बीमारी, विभाग को खबर नहीं

नई बस्ती के आठ साल के सुधाकर को आखिर क्या हुआ कि उसकी मौत हो गई, इस सवाल का जवाब विभाग के पास नहीं है। सिर्फ एक उल्टी से आठ साल के बच्चे की जान कैसे जा सकती है, यह डॉक्टर भी नहीं बता पा रहे। पहले तो स्थानीय डॉक्टरों ने इसे फूड प्वाइजनिंग से जुड़ा मामला बताया, लेकिन फूड प्वाइजनिंग भी इतनी तेजी से जान कैसे ले सकती है, इस बात का जवाब मुकम्मल नहीं हुआ है। खमरिया सीएचसी अधीक्षक डॉ. वीके स्नेही का कहना है कि फूड प्वाइजनिंग काफी तेज संक्रमण करती है। लग रहा है कि बच्चा उसी संक्रमण का शिकार होगा। लेकिन फूड प्वाइजनिंग के प्रकरण में भी समय रहते इलाज से जान बचाई जा सकती है।

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