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2 अगस्त, 2020|11:55|IST

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श्रीराम मन्दिर की नींव को मजबूत करेगी धौरहरा की माटी

श्रीराम मन्दिर की नींव को मजबूत करेगी धौरहरा की माटी

गोस्वामी तुलसीदास की रचनास्थली रही धौरहरा की रामवाटिका की मिट्टी भी अयोध्या में बन रहे भगवान श्रीराम के भव्य मन्दिर में लगेगी। इसके लिए यहां की मिट्टी का कलश भरकर भक्तों की टीम रविवार को अयोध्या पहुंच गई है। धौरहरा की मिट्टी अयोध्या में बन रहे भगवान श्रीराम के भव्य मन्दिर की नींव में शामिल होगी। इससे धौरहरा क्षेत्र के लोगों में उत्साह बढ़ गया है।

धौरहरा में राम वाटिका धाम स्थित है। शारदा व घाघरा नदी के बीच स्थित यह स्थल काफी शांत व सुहावना। प्राचीन इस धाम को लेकर मान्यता है कि गोस्वामी तुलसीदास ने यहां विश्राम किया था। इस दौरान यहां वट वृक्ष रोपा था। यहा एक विशाल ठाकुरद्वारा भी था। कुछ लोगो ने जीर्णोधार के नाम पर इसे ढहा दिया। मान्यता है कि यहीं पर विश्राम के दौरान गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस के बालकांड की रचना की थी। इसके बाद ईंटे व मूर्तियां तक गायब हो गईं, लेकिन ऐतिहासिक वटवृक्ष आज तक अपने विशाल स्वरूप में मौजूद है। अयोध्या में श्रीराम मन्दिर निर्माण के लिये पांच अगस्त को प्रधानमंत्री शिलान्यास करेंगे। इसके लिये देश भर के तीर्थो से जल और मिट्टी को अयोध्या पहुंचाने का काम चल रहा है। धौरहरा के कुछ युवाओ ने राष्ट्रीय स्वय सेवक संघ के पदाधिकारियो के माध्यम से अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि न्यास के पदाधिकारियो से वार्ता की। सहमति मिलने के बाद रविवार को कस्बा धौरहरा में रहने वाले राजहंस मिश्र, गोपाल शंकर अवस्थी, आशुतोष मिश्र व कन्हैया रामवाटिका से मिट्टी का कलश और जल लेकर अयोध्या पहुंचे। इस सामग्री को वहां न्यास के हवाले किया गया है। गोस्वामी तुलसीदास ने रामवाटिका धाम में विश्राम के दौरान रामचरित मानस के बालकांड की रचना यहीं की थी। इसके बाद इस स्थल की मान्यता और बढ़ गई। गोस्वामी तुलसीदास से क्षेत्र के गांव दुलही में रुककर सुन्दरकांड की रचना की थी। रामवाटिका धाम धार्मिक स्थल है।

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  • Web Title:Dhaurhara 39 s soil will strengthen the foundation of Shri Ram temple