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25 नवंबर, 2020|5:33|IST

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महीने भर में बाघ के तीन जानें लेने के बाद चेता जंगल महकमा

महीने भर में बाघ के तीन जानें लेने के बाद चेता जंगल महकमा

1 / 2महीने भर में तीन लोगों की जान लेने के बाद इंसानी खून का चस्का लेने वाले बाघ को जंगल में रोके रखने के लिए अब वन विभाग चेता...

महीने भर में बाघ के तीन जानें लेने के बाद चेता जंगल महकमा

2 / 2महीने भर में तीन लोगों की जान लेने के बाद इंसानी खून का चस्का लेने वाले बाघ को जंगल में रोके रखने के लिए अब वन विभाग चेता...

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तिकुनियां-खीरी।

महीने भर में तीन लोगों की जान लेने के बाद इंसानी खून का चस्का लेने वाले बाघ को जंगल में रोके रखने के लिए अब वन विभाग चेता है। सपा नेता समेत तमाम लोगों के प्रदर्शन और वन चौकी का घेराव करने के बाद विभाग ने सोमवार को जंगल किनारे जेसीबी से खाई खुदवानी शुरू की है। इसके साथ ही बाघ के हमले में मारे गए अवधेश के भाई को वन विभाग ने दस हजार की तात्कालिक सहायता राशि का चेक दिया है।

शनिवार को जंगल किनारे मवेशी चराने गए मझरा गांव के अवधेश पर बाघ ने हमला करके गंभीर रूप से घायल कर दिया था। उसके साथियों के हल्ला मचाने पर बाघ उसे छोड़कर जंगल के भीतर तो घुस गया लेकिन अवधेश की मौत हो चुकी थी। रविवार को बाघ के आतंक से त्रस्त ग्रामीणों ने सपा नेता हिमांशु पटेल की अगुआई में धरना-प्रदर्शन करते हुए मझरा वन चौकी पर का घेराव किया था। उन्होंने जंगली जानवरों के हमलों से लगातार जा रही इंसानी जानों के अलावा उनकी फसलों और घरों को बचाने के लिए जंगल किनारे बैरीकेडिंग वगैरह उपाय करने की मांग की थी। इसके बाद ही वन विभाग ने सोमवार से जंगल किनारे खाई लगाने के लिए जेसीबी को लगाया है। वैसे तो पड़ोस में खुली सीमा वाला जंगल होने से इस इलाके में जंगली हाथी, बाघ, सुअर आदि का घूमना और हमला कर देना सामान्य सी बात हो चुकी है लेकिन बीते एक महीने में ही बाघ तीन जानें ले चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि इस बाघ के मुंह में इंसानी खून लग चुका होने से यह आदमखोर हो गया है। छह अक्टूबर को अपना खेत देख देखने गए दलराजपुर निवासी बुजुर्ग सुंदर सिंह को बाघ ने अपना निवाला बना लिया था। काफी खोजबीन के बाद दो-तीन दिन बाद इनके सिर और पैर के अवशेष ही घरवालों को मिले थे। दस अक्टूबर को जंगल किनारे मवेशी चराने गए प्यारेलाल पर घात लगाए बैठे बाघ ने हमला कर उनको जंगल में घसीट ले गया था। इनका अधखाया शव बाद में मिला था। इसके बाद अवधेश का बाघ ने अपना शिकार बना लिया।

रेंजर विमलेश कुमार ने बताया कि हाथी सहित अन्य हिंसक जानवरो को आबादी में जाने से रोकने के लिए जंगल के किनारे-किनारे जेसीबी से दो मीटर चौड़ी और दो मीटर गहरी खाई बनवाई जा रही है। ग्रामीणों को एक से डेढ़ महीने तक जंगल की तरफ न जाने को कहा गया है। उन्होंने बताया कि हिंसक जानवर का शिकार हुए अवधेश के भाई रामगोपाल यादव को दस हजार रुपए का चेक दे दिया गया है। इस दौरान वन दरोगा हरिलाल, मुशीर खां, वन रक्षक रमाशंकर पांडे, सतीश मिश्र और ग्राम प्रधान मौजूद थे।

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  • Web Title:After three tiger deaths in a month Chetah jungle department