Hindi NewsUP NewsLack of recognition is not a ground for closing down a madrasa, High Court orders this to be done within 24 hours
मान्यता न होना मदरसे को बंद करने का आधार नहीं, हाईकोर्ट का 24 घंटे में यह करने का आदेश

मान्यता न होना मदरसे को बंद करने का आधार नहीं, हाईकोर्ट का 24 घंटे में यह करने का आदेश

संक्षेप:

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बिना मान्यता चल रहे एक मदरसे को बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने कहा कि मान्यता न होना मदरसे को बंद करने का आधार नहीं हो सकता है। इसके साथ ही वहां लगी सील को 24 घंटे में हटाने का आदेश दिया है।

Jan 20, 2026 08:16 am ISTYogesh Yadav लखनऊ। विधि संवाददाता
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हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बिना मान्यता संचालित मदरसों को लेकर महत्वपूर्ण आदेश दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि सिर्फ मान्यता न होने के आधार पर किसी मदरसे को बंद करने का कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है। इसी के साथ न्यायालय ने श्रावस्ती के मदरसा अहले सुन्नत इमाम अहमद रजा पर लगी सील को 24 घंटे में हटाने का आदेश भी दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने उक्त मदरसा प्रबंधन की याचिका पर दिया।

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याचिका में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, श्रावस्ती के 1 मई 2025 के आदेश को चुनौती दी गयी थी जिसके द्वारा उन्होंने मदरसा को बंद करने का आदेश दिया था। मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से यह दलील दी गई कि बिना मान्यता के मदरसा चलने से विद्यार्थियों को भविष्य में शैक्षणिक लाभ मिलने में कठिनाई हो सकती है। हालांकि न्यायालय ने कहा कि संबंधित नियमावली में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत केवल मान्यता के अभाव में मदरसे का संचालन रोका जा सके।

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न्यायालय ने जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी का मदरसा बंद करने का आदेश निरस्त कर दिया। हालांकि न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक मदरसे को मान्यता प्राप्त नहीं होगी, तब तक वह किसी भी प्रकार की सरकारी अनुदान राशि का दावा नहीं कर सकेगा और न ही मदरसा शिक्षा बोर्ड उसके छात्रों को बोर्ड परीक्षा में बैठने की अनुमति देने के लिए बाध्य होगा। इसके साथ ही ऐसे मदरसे से प्राप्त योग्यता का उपयोग राज्य सरकार से संबंधित किसी भी लाभ के लिए नहीं किया जा सकेगा।

शिक्षा के अधिकार और नियमों के बीच संतुलन

अदालत के इस फैसले को उन हजारों गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, जिन पर हाल के दिनों में प्रशासनिक कार्रवाई की तलवार लटक रही थी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट ने इस आदेश के जरिए स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षा प्रदान करने की स्वतंत्रता और प्रशासनिक नियंत्रण के बीच एक बारीक रेखा है।

हालांकि, मदरसा संचालकों के लिए यह एक चेतावनी भी है कि बिना मान्यता के वे केवल एक निजी संस्था के रूप में ही अस्तित्व में रह सकते हैं। उन्हें न तो बोर्ड से मान्यता मिलेगी और न ही वहां पढ़ने वाले छात्रों की डिग्रियां सरकारी नौकरियों के लिए मान्य होंगी। अब यह मदरसा प्रबंधन पर निर्भर करेगा कि वे अपने छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए जल्द से जल्द सरकारी मानकों को पूरा कर मान्यता प्राप्त करें।