कर्मचारियों की छंटनी से पहले कंपनियों को सरकार लेनी होगी अनुमति, श्रम कानून पर बोले मंत्री राजभर
यूपी के श्रम मंत्री अनिल राजभर ने श्रम संहिताओं के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उद्योगों और श्रमिकों के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए शिकायत परितोष समिति, वार्ताकारी परिषद और दो सदस्यीय औद्योगिक अधिकरण का गठन किया गया है।

श्रम मंत्री अनिल राजभर ने रविवार को लोक भवन में बताया कि नई श्रम संहिता के मुताबिक 300 से ज्यादा कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को अब छंटनी के पहले प्रदेश सरकार की अनुमति लेनी होगी। न केवल छंटनी बल्कि बंदी के लिए भी यही व्यवस्था होगी। इसके अतिरिक्त सामूहिक अवकाश को भी हड़ताल में शामिल किया गया है और 14 दिनों की पूर्व सूचना के बिना किसी भी हड़ताल या तालाबंदी पर रोक लगा दी गई है।
मंत्री ने रविवार को विस्तार से श्रम संहिताओं के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उद्योगों और श्रमिकों के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए शिकायत परितोष समिति, वार्ताकारी परिषद और दो सदस्यीय औद्योगिक अधिकरण का गठन किया गया है। नई संहिताएं 21 नवंबर से प्रदेश में प्रभावी हो चुकी हैं। इन सुधारों से श्रम कानूनों की जटिलताओं में कमी आई है। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए निरीक्षण व्यवस्था को ऑनलाइन कर दिया गया है। अब इंस्पेक्टर राज की अवधारणा समाप्त होगी। किसी भी प्रथम उल्लंघन की स्थिति में नियोक्ता अधिकतम जुर्माने के 50 प्रतिशत का भुगतान कर उपशमन प्राप्त कर सकेंगे।
न्यूनतम वेतन अब सभी संगठित और असंगठित क्षेत्रों पर लागू होगा। सेवा समाप्ति या त्यागपत्र की स्थिति में दो दिनों के भीतर सभी देयक का भुगतान सुनिश्चित किया गया है। ओवरटाइम के लिए दोगुने वेतन का प्रावधान, वेतन से कटौती की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत और सभी कर्मचारियों को वेज-स्लिप देना अब अनिवार्य किया गया है। पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को वैधानिक रूप से परिभाषित कर सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया गया है।
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Dinesh Rathourदिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट
पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर
यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका
(डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर
आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और
डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।
लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल
वीडियो) को बारीकी से विश्लेषण करने के लिए जाने जाते हैं।
पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब
एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो
उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने
करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में
प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी
है।


