
नाबालिग से छेड़छाड़ के दोषी युवक को एक साल की कैद
Kushinagar News - कुशीनगर में विशेष न्यायाधीश ने खड्डा थाना क्षेत्र की 17 वर्षीय छात्रा के साथ छेड़छाड़ और धमकी देने के मामले में युवक सोएब को एक साल की कैद और 20,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अदालत ने कहा कि महिला की मर्यादा का उल्लंघन करने वाला कोई भी कार्य अपराध है।
कुशीनगर, वरिष्ठ संवाददाता। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट दिनेश कुमार की अदालत ने खड्डा थाना क्षेत्र की किशोरी से छेड़छाड़ व धमकी देने के मामले में युवक को दोषी करार देते हुए उसे एक साल की कैद व 20 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अपने फैसले में अदालत ने यह टिप्पणी की है कि महिला की मर्यादा के प्रति सदमा पहुंचाने वाला कोई भी कृत्य अपराध है, भले ही जानबूझ कर ऐसा करने का आशय न रहा हो। अभियुक्त के आचरण से सभ्य समाज में पढ़ने जाने के लिए पीड़ित छात्रा अपने आप को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रही थी।
आज के सामाजिक परिवेश में प्रायः ऐसे कृत्य की बार बार पुनरावृत्ति हो रही है। अतः अभियुक्त को दण्डित करने से ऐसे अपराध पर निश्चित ही भविष्य में रोक लगने की सम्भावना रहेगी। खड्डा थाना क्षेत्र के एक वार्ड की निवासी 17 साल की पीड़िता छात्रा की मां ने 2024 में अभियुक्त सोएब उर्फ सुहेल पुत्र लल्लन अंसारी निवासी जटाशंकर पोखरा थाना खड्डा के विरुद्ध छेड़खानी, जान से मारने धमकी देने व पॉक्सो एक्ट की धाराओं में केस दर्ज कराया था। आरोप था कि अभियुक्त, नाबालिग लड़की के साथ छेडखानी करता था। फोन पर लगातार बात करके परेशान करता था। अभियुक्त ने वादी पक्ष को गाली गुप्ता भी दी। पीड़िता को जान से मारने की धमकी दी। बात न करने पर मुंह पर तेजाब फेंकने की धमकी दी। वादिनी पक्ष के द्वारा उक्त कृत्य से तंग आकर पीड़िता को अपनी रिश्तेदारी में भेज दिया, यहां पर भी जाकर अभियुक्त ने उसे तंग किया। पीड़िता की शादी कहीं लग गयी थी, पीड़िता के मंगेतर को भी फोन पर गाली गुप्ता दिया गया। विवेचक ने विवेचना पूरी कर अदालत में आरोपपत्र प्रस्तुत किया था। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट दिनेश कुमार की अदालत में सुनवाई हुई। अभियोजन की तरफ से 6 साक्षीगण न्यायालय में परीक्षित कराये गये। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सोमवार को खुले न्यायालय में अभियुक्त सोएब उर्फ सुहेल पुत्र लखन अंसारी को को दोषी करार दिया गया। अदालत ने उसे एक साल की कैद व बीस हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड का आधा हिस्सा पीड़ित को प्रतिकर के रूप में दिया जाएगा। विशेष शासकीय अधिवक्ता (पाक्सो एक्ट) सुनील कुमार मिश्र व संजय तिवारी के द्वारा गम्भीरता से मुकदमे की शासन की तरफ से पैरवी की गयी। अदालत की टिप्पणी निर्णय सुनाते हुए अदालत ने टिप्पणी की कि अभियुक्त का आपराधिक आशय ही उसका मूल तत्व है। महिला की प्रतिक्रिया अत्यन्त सुसंगत है किन्तु उसका अभाव सदैव निर्णायक नहीं है। अपराध के गठन के लिये यह ज्ञान ही पर्याप्त है कि महिला का शील भंग होने की संभावना है। भले ही जानबूझकर ऐसे शील भंग किये जाने का आशय न रहा हो। यह सुनिश्चित करने के लिये कि शील भंग हुआ है या नहीं, इसका यहीं परीक्षण है कि क्या अपराधी का कृत्य ऐसा था जो किसी महिला की मर्यादा के प्रति सदमा पहुंचाने वाला हो।

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