
तकनीक से जुड़ फोटोग्राफरों ने दूर की चुनौतियां, बनाई अलग पहचान
Kushinagar News - कुशीनगर में विश्व फोटोग्राफी दिवस मनाया गया, जो फोटोग्राफरों की यात्रा और तकनीकी विकास का प्रतीक है। पिंटू शाह और संजीव कुमार जैसे युवा फोटोग्राफरों ने फोटोग्राफी को जुनून के रूप में अपनाया और आधुनिक...
कुशीनगर। आज विश्व फोटोग्राफी दिवस है। यह दिन हमें न सिर्फ तस्वीरों की अहमियत की याद दिलाता है, बल्कि उन फोटोग्राफरों के सफर को भी सामने लाता है, जिन्होंने समय के साथ आई चुनौतियों को स्वीकार किया और तकनीक को अपनाकर खुद को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। एक वह दौर था, जब फोटोग्राफी को किसी कला से कम नहीं माना जाता था। उस समय कैमरे भारी-भरकम होते थे और उन्हें संभालना आसान काम नहीं था। तस्वीर खींचने के बाद लंबा इंतजार करना पड़ता था। उसके बाद फोटो तैयार होकर हाथ में आती थी। खासकर छोटे शहरों में लोग फोटो स्टूडियो ही जाया करते थे, क्योंकि वही जगह थी, जहां उनकी खास यादें तस्वीरों के जरिए कैद हो सकती थीं।
ब्लैक एंड व्हाइट फोटो का जमाना था और एक तस्वीर खिंचवाना भी लोगों के लिए खास मौके जैसा होता था। समय बदला और तकनीक ने फोटोग्राफी की दुनिया को पूरी तरह से बदलकर रख दिया। डिजिटल कैमरों और फिर मोबाइल के आने से तस्वीर खींचना और उन्हें तुरंत देख लेना अब बेहद आसान हो गया है। आज यह कला न सिर्फ सरल हुई है, बल्कि एक बड़ा पेशा भी बन चुकी है। शादी-विवाह, जन्मदिन, धार्मिक आयोजनों से लेकर राजनीतिक और सामाजिक कार्यक्रमों में फोटोग्राफरों की मौजूदगी बढ़ने लगी है। इस बदलाव की सबसे बड़ी बात यह रही कि जिसने तकनीक को अपनाया, उसने अपनी एक अलग पहचान बना ली। वहीं, जो फोटोग्राफर बदलाव के साथ कदमताल नहीं कर सके, वे धीरे-धीरे इस पेशे से बाहर हो गए। आज शहर के पुराने फोटो स्टूडियो भी आधुनिक उपकरणों से लैस हैं। जहां कभी ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरों की मांग होती थी, वहीं आज रंगीन फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और यहां तक कि ड्रोन कैमरों से शूटिंग आम हो गई है। शादी-विवाह में एरियल शॉट्स से लेकर म्यूजिक एलबम और शॉर्ट फिल्म्स तक फोटोग्राफरों ने अपने हुनर को नए आयाम दिए हैं। तकनीक के इस दौर ने युवा पीढ़ी को भी अपनी ओर आकर्षित किया है। एक को शौक ने बनाया फोटोग्राफर तो दूसरे ने पिता से ली सीख : पडरौना शहर के दो युवा फोटोग्राफर पिंटू शाह और संजीव कुमार इस बदलाव की मिसाल हैं। दोनों ने कम उम्र में ही फोटोग्राफी को सिर्फ एक पेशा नहीं बल्कि एक जुनून की तरह अपनाया। आधुनिक कैमरों और एडवांस तकनीक का इस्तेमाल करते हुए दोनों युवाओं ने अपने काम से लोगों को प्रभावित किया है। पिंटू शाह ने बताया कि बचपन में वह खेलकूद में ज्यादा रूचि रखते थे। इस बात से परिजन नाराज होने लगे। मां ने फटकार लगाई और फिर एक रिश्तेदार के यहां फोटो स्टूडियो की दुकान पर रखवा दिया। धीरे-धीरे फोटोग्राफी का शौक बढ़ने लगा और इस पेशे में मन लगने लगा। सालों तक उस स्टूडियो पर काम करने के बाद पिंटू ने बाद में अपनी खुद की दुकान खोल ली और आज वह शहर के अच्छे फोटोग्राफर के रूप में जाने जाते हैं। वहीं, संजीव कुमार ने बताया कि उनके पिता उस जमाने में शहर के अच्छे फोटोग्राफर थे। ज्यादातर लोग उनके पास ही काम सीखने आते थे। संजीव भी दुकान पर पिता का हाथ बंटाने जाते थे, जहां उन्होंने अपने पिता से फोटोग्राफी की सीख ली और आज वह अपने पिता के पुराने स्टूडियो को नई तकनीक के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। संजीव को अच्छी एडिटिंग भी आती है और वह भी नए युवाओं को फोटोग्राफी के लिए तैयार कर रहे हैं।

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