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महराजगंज और सिद्धार्थनगर जिले से भी जुड़े हैं आयुष्मान योजना के घपलेबाजों के तार

कुशीनगर। निज संवाददाता केंद्र सरकार की महत्चाकांक्षी योजनाओं में शामिल आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन...

महराजगंज और सिद्धार्थनगर जिले से भी जुड़े हैं आयुष्मान योजना के घपलेबाजों के तार
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हिन्दुस्तान टीम,कुशीनगरTue, 18 Jun 2024 10:45 AM
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कुशीनगर। निज संवाददाता
केंद्र सरकार की महत्चाकांक्षी योजनाओं में शामिल आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में जो गड़बड़ी कुशीनगर जिले में हुई है, वह पहले कभी न देखी गई थी और न सुनी गई थी। पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इसमें नए तथ्य सामने आ रहे हैं। अब महराजगंज और सिद्धार्थनगर के भी स्वास्थ्य विभाग के कुछ लोगों की डिटेल पेनड्राइव में पुलिस को मिलने की बात कही जा रही है। चर्चा है कि यहां से उन लोगों के खाते में रकम भेजी गई है। पुलिस संबंधित लोगों के बैंक खाते का वेरीफिकेशन करा रही है। इसके पूरा होने पर कई और राज बाहर आ सकते हैं।

आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना तो चयनित गरीब परिवारों को 5 लाख रुपये तक की सालाना चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए शुरू की गई थी, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों ने ही मिलकर इसे खोखला करने का इंतजाम कर दिया। विभाग से जुड़े लोग ही नहीं, अस्पताल संचालकों ने भी खुले हाथों से इसका जितना मन चाहा, फायदा उठाया। शिकायत के आधार पर पुलिस विभाग ने जब इसकी जांच की तो इसका गलत फायदा उठाने वालों की साजिश का पता चला। आयुष्मान भारत योजना का लाइसेंस देने से लेकर, इलाज और भुगतान में गलत तरीके अपनाकर खूब धनादोहन किया गया। पुलिस की जांच के बाद पकड़े गए डीपीसी, ऑडिटर सहित चारो व्यक्तियों से मौखिक और साक्ष्य के आधार पर जो जानकारी मिली, उसके बारे में जो भी सुन रहा है, वह हैरान रह जा रहा है। पुलिस सूत्रों की मानें तो कुछ पेनड्राइव पुलिस के हाथ लगी हैं, जिसमें महराजगंज और सिद्धार्थनगर के स्वास्थ्य विभाग के कुछ लोगों का विवरण होना बताया जा रहा है। उनके खाते में भी इस योजना के रुपये भेजे जाने की बात कही जा रही है। यदि जांच सही दिशा में चलती रही तो अभी कई बड़े लोगों के चेहरे इसकी आंच में झुलस सकते हैं।

आयुष्मान भारत योजना में कुशीनगर जनपद में काफी गड़बड़ी की गई है। जिन-जिन के खाते में रुपये भेजे गए हैं, संबंधित बैंकों को सारे साक्ष्यों के साथ डिटेल भेजकर वेरीफिकेशन कराया जा रहा है। एफआईआर कॉपी, सभी प्रकार के साक्ष्य संबंधित बैंकों को उपलब्ध कराए जा रहे है। क्योंकि बैंक आसानी से खातों की डिटेल नहीं दे सकते। इसलिए डाटा एनालिसिस और वेरीफिकेशन में समय लग रहा है। जांच चल रही है। जांच पूरी होने के बाद यह बताया जा सकेगा कि इस गड़बड़ी में और कौन-कौन संलिप्त है।

धवल जायसवाल, पुलिस अधीक्षक

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