अहंकार के त्याग से मिलता है भगवान का सानिध्य
कुशीनगर के धुनवलिया गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य राजेश शास्त्री ने राजा परीक्षित के श्राप की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि मृत्यु सप्ताह के सात दिनों के भीतर निश्चित होती है और अहंकार त्याग कर भगवान वासुदेव की भक्ति में लगना चाहिए।

कुशीनगर, हिन्दुस्तान टीम। क्षेत्र के धुनवलिया गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान वृन्दावन धाम से पधारे कथावाचक आचार्य राजेश शास्त्री ने रविवार को राजा परीक्षित के श्राप की कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।आचार्य शास्त्री ने कहा कि प्रत्येक प्राणी की मृत्यु सप्ताह के सात दिनों के भीतर ही निश्चित है, अर्थात सोमवार से रविवार के बीच ही जीवन का अंत होता है। इसके बावजूद मनुष्य अहंकार के वशीभूत होकर बड़े से बड़े अपराध करने से भी नहीं हिचकता और यह मानकर चलता है कि उसका शरीर सदा वैसा ही बना रहेगा। उन्होंने इसे मानव जीवन की सबसे बड़ी भूल बताया।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को अहंकार का त्याग कर भगवान वासुदेव की भक्ति एवं सेवा में लगना चाहिए। ऐसा करने से ही जीव को मोक्ष एवं सद्गति की प्राप्ति होती है। कथा के मुख्य यजमान मारकंडेश्वर शरण पांडेय ने सपरिवार उपस्थित अतिथियों का स्वागत किया। इस दौरान भाजपा फाजिलनगर मंडल के पूर्व अध्यक्ष मुकुल तिवारी, डॉ. शरमेंद्र मिश्र, प्रदीप उपाध्याय, विनोद तिवारी, सूरज मद्धेशिया आदि मौजूद रहे।
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