निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतों से महंगा हुआ घर बनाना
कुशीनगर में ईंट उद्योग मौसम की बेरुखी और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के कारण संकट में है। लगातार बारिश से कच्ची ईंटों का उत्पादन घटा है, जिससे ईंटों की कीमतों में वृद्धि हुई है। निर्माण सामग्री के दामों में भी तेजी आई है, जिससे घर बनाना और मरम्मत करना महंगा हो गया है।

कुशीनगर। एक ओर मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के असर से ईंधन और परिवहन लागत बढ़ रही है तो दूसरी ओर मौसम की बेरुखी ने ईंट उद्योग की कमर तोड़ दी है। इन दोनों कारणों का सीधा असर निर्माण कार्यों पर पड़ा है। ईंट, सीमेंट, बालू, गिट्टी, सरिया से लेकर प्लाईवुड, फेविकोल और अन्य निर्माण सामग्रियों के दाम बढ़ने से अब घर बनाना और उसकी मरम्मत कराना पहले की तुलना में काफी महंगा हो गया है।
ईंट भट्ठा उद्योग पर असर
कुशीनगर जिले में इस वर्ष मई माह के दौरान हुई लगातार बारिश ने ईंट भट्ठा उद्योग को सबसे अधिक प्रभावित किया। सामान्य वर्षों में जिले के अधिकांश भट्ठों पर 20 जून तक उत्पादन जारी रहता था और एक सीजन में पांच से छह चक्कर तक ईंटें तैयार होती थीं। लेकिन इस बार अधिकांश भट्ठे दो से तीन चक्कर पूरे करने के बाद ही मई के अंत तक बंद हो गए। इससे बाजार में ईंटों की उपलब्धता और लागत दोनों प्रभावित हुई हैं। ईंट व्यवसायियों का कहना है कि बीते 29 अप्रैल से लेकर मई के अंत तक कई बार हुई बारिश के कारण बड़ी मात्रा में कच्ची ईंटें गल गईं। इससे उत्पादन लागत में भारी वृद्धि हुई। कच्ची ईंटों को दोबारा तैयार करने में अतिरिक्त कोयले और श्रम की जरूरत पड़ी, जिससे लागत और बढ़ गई। परिणामस्वरूप ईंटों के दामों में क्षेत्रवार प्रति ट्रॉली दो से तीन हजार रुपये तक की वृद्धि दर्ज की गई है।
निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतें
वहीं, निर्माण सामग्री के बाजार में भी तेजी का माहौल है। भवन निर्माण में उपयोग होने वाली सीमेंट, बालू, गिट्टी और सरिया के दामों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसके अलावा प्लाईवुड, फेविकोल, नारियल की रस्सी, कांटी, लोहे के तार, पेंट और विभिन्न केमिकल आधारित उत्पादों की कीमतें भी बढ़ी हैं। कच्चे तेल से जुड़े उत्पादों के महंगे होने, पैकेजिंग लागत बढ़ने और परिवहन खर्च में वृद्धि का असर इन सामग्रियों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। इसका प्रभाव केवल नए मकानों के निर्माण तक सीमित नहीं है। पुराने मकानों की पुट्टी, पेंटिंग, वॉटरप्रूफिंग, मरम्मत और रिनोवेशन जैसे कार्यों का खर्च भी तेजी से बढ़ गया है। ऐसे में जिन परिवारों ने मकान निर्माण या मरम्मत की योजना बना रखी थी, उनके बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
ईंट व्यवसायियों की चिंताएं
ईंट व्यवसायी संघ के जिलाध्यक्ष छेदी राव ने बताया कि लगातार बारिश से ईंट उद्योग को भारी नुकसान हुआ है। कच्ची ईंटों के खराब होने से उत्पादन लागत बढ़ी है। साथ ही टैक्स, रॉयल्टी, कोयले और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी ने उद्योग को और संकट में डाल दिया है। उन्होंने कहा कि ईंट भट्ठों पर काम करने वाले विशेष श्रमिकों को समय से पहले भुगतान कर घर भेजना पड़ा, जिससे संचालकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है। उन्होंने सरकार से टैक्स और रॉयल्टी शुल्क में राहत देने की मांग की है।
बाजार में उतार-चढ़ाव
हार्डवेयर व्यवसायी पंकज कसौधन का कहना है कि फेविकोल की कीमत में करीब 25 रुपये प्रति किलो, प्लाईवुड में लगभग 10 रुपये प्रति वर्गफुट और कांटी के दाम में करीब 10 रुपये प्रति किलो की वृद्धि हुई है। बिल्डिंग मैटेरियल व्यवसायी संतोष जायसवाल का कहना है कि सीमेंट, मोरंग, गिट्टी और सरिया के दामों में लगातार वृद्धि से व्यापारियों के लिए पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना भी चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। निर्माण क्षेत्र से जुड़े व्यवसायियों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां और कच्चे माल की लागत इसी तरह बढ़ती रही तो आने वाले महीनों में निर्माण सामग्री के दामों में और तेजी आ सकती है। इसका असर ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में देखने को मिलेगा।


