बच्चों में बढ़ रहे टेम्पर टैंट्रम के मामले, सजग रहें अभिभावक

Feb 16, 2026 12:45 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, कुशीनगर
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Kushinagar News - कुशीनगर में छोटे बच्चों में टेम्पर टैंट्रम के मामले बढ़ रहे हैं। अभिभावकों में चिंता है क्योंकि बच्चे गुस्से में रोने, चिल्लाने या जमीन पर लेटने लगते हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कमलेश वर्मा के अनुसार, यह एक सामान्य विकासात्मक अवस्था है, लेकिन इसके पीछे कई कारण हैं जैसे मोबाइल का अधिक उपयोग और अनियमित दिनचर्या।

बच्चों में बढ़ रहे टेम्पर टैंट्रम के मामले, सजग रहें अभिभावक

कुशीनगर। कुशीनगर जिले में छोटे बच्चों में टेम्पर टैंट्रम (गुस्से के तीव्र दौरे) के मामले सामने आ रहे हैं। घर, बाजार और स्कूलों के आसपास अक्सर ऐसे मामले देखने को मिल रहे हैं, जहां बच्चे अचानक रोना-चिल्लाना शुरू कर देते हैं, जमीन पर लेट जाते हैं या सामान फेंकने लगते हैं। इस बदलते व्यवहार को लेकर अभिभावकों में चिंता बढ़ी है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कमलेश कुमार वर्मा ने बताया कि 1 से 5 वर्ष की आयु के बच्चों में टेम्पर टैंट्रम एक सामान्य विकासात्मक अवस्था है, लेकिन हाल के वर्षों में इसके मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। उन्होंने कहा कि पहले जहां महीने में कुछ ही मामले परामर्श के लिए आते थे तो वहीं अब लगभग प्रतिदिन ऐसे अभिभावक पहुंच रहे हैं, जो बच्चों के आक्रामक या जिद्दी व्यवहार से परेशान हैं।

डॉ. वर्मा के अनुसार इस समस्या के पीछे कई कारण हैं। छोटे बच्चों की भाषा और भावनात्मक अभिव्यक्ति पूरी तरह विकसित नहीं होती, जिससे वे अपनी बात स्पष्ट रूप से नहीं कह पाते हैं। जब उनकी इच्छाएं पूरी नहीं होतीं तो वे गुस्से के रूप में प्रतिक्रिया देते हैं। इसके अलावा मोबाइल फोन का बढ़ता उपयोग, अनियमित दिनचर्या, नींद की कमी और अत्यधिक लाड-प्यार भी टैंट्रम को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने बताया कि टैंट्रम को बीमारी समझकर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन इसे नजरअंदाज भी नहीं किया जाना चाहिए। अगर बच्चा बार-बार अत्यधिक आक्रामक हो रहा है, खुद को या दूसरों को चोट पहुंचाने की कोशिश कर रहा है या पांच वर्ष की आयु के बाद भी व्यवहार में सुधार नहीं हो रहा है तो विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। अभिभावकों के लिए जरूरी सुझाव : डॉ. कमलेश कुमार वर्मा ने बताया कि टैंट्रम के समय सबसे जरूरी है अभिभावकों का शांत रहना। बच्चे को डांटना, मारना या सार्वजनिक रूप से अपमानित करना स्थिति को और बिगाड़ सकता है। बेहतर है कि बच्चे को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर कुछ समय दें और शांत स्वर में समझाएं। उन्होंने नियमित दिनचर्या बनाने, संतुलित आहार देने और स्क्रीन टाइम सीमित रखने पर जोर दिया। बच्चों को छोटी-छोटी बातों में विकल्प देना, जैसे लाल कपड़े पहनोगे या नीले, उन्हें नियंत्रण का अहसास कराता है और जिद कम करता है। डॉ. वर्मा का कहना है कि सकारात्मक संवाद, धैर्य और प्रेमपूर्ण अनुशासन ही टेम्पर टैंट्रम से निपटने का सही तरीका है। समय रहते जागरूकता और सही मार्गदर्शन से बच्चों के व्यवहार को संतुलित किया जा सकता है और उनके स्वस्थ मानसिक विकास को सुनिश्चित किया जा सकता है।

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