Kushinagar News: बारिश से बढी खाद की डिमांड, समितियों का चक्कर लगा रहे किसान

हिन्दुस्तान, कुशीनगर
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Kushinagar News: कुशीनगर जिले में मूसलाधार बारिश के बाद किसानों में यूरिया खाद की मांग अचानक बढ़ गई है। खरीफ सीजन के चलते समितियों में खाद की कमी है, जिसे लेकर किसान परेशान हैं। विभाग का दावा है कि खाद का स्टॉक मौजूद है, लेकिन वास्तविकता में कमी से किसान आक्रोशित हैं।

Kushinagar News: बारिश से बढी खाद की डिमांड, समितियों का चक्कर लगा रहे किसान

Kushinagar News: कुशीनगर, मिथिलेश द्विवेदी। जिले में मूसलाधार बारिश के बाद जिले में यूरिया खाद की डिमांड यकायक बढ गई है। खरीफ का सीजन शुरू होने के बाद से जिले के अधिकांश बी पैक्स समितियों से खाद की कमी है। समितियों पर खाद नहीं मिलने के कारण किसान हलकान हैं। किसान खाद के लिए प्राइवेट दुकानों का चक्कर लगा रहे हैं। वहीं विभाग का दावा है कि समितियों पर खाद का स्टॉक किया गया है, लेकिन इसके विपरीत खाद गायब होने से किसानों में इसे लेकर आक्रोश है।

किसान की स्थिति

जनपद में कुल 145 बी पैक्स समितियों में सभी समितियां सक्रिय हैं। इन समितियों में विभाग का दावा है कि पर्याप्त मात्रा में डीएपी, एनपीके, यूरिया व नैनो डीएपी भेजा गया था। समितियों को मिले खाद का वितरण हो चुका है। विभाग का दावा है कि खाद का स्टॉक समितियों में 1987 यूरिया, 1260 डीएपी, 300 मीट्रिक टन एनपीकेएस उपलब्ध है। वहीं रिजर्व में डीएपी 1330, एनपीकेएस 1670 व यूरिया 1430 मीट्रिक टन सामान्य यूरिया मौजूद है। कुल 6017 एमटी यूरिया, 2990 डीएपी व 2270 एमटी एनपीकेएस उपलब्ध है। इसके अलावा सामान्य योजना के तहत 2600 एमटी यूरिया, 400 एमटी डीएपी व 300 एनपीकेएस एमटी स्टॉक बना हुआ है। बताया जाता है कि एक दिन पूर्व सोमवार को कृभको की 1500 एमटी यूरिया की रैक पहुंची थी। दो दिन पहले इफको की 1600 एमटी यूरिया आई थी। मंगलवार को आईपीएल की 840 व 1400 डीएपी खाद मिली है। जिले के अधिकांश समितियों को पुन: खाद का आवंटित किया गया है। विभागीय दावा के उलट समितियों से खाद गायब होने से किसानों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

अगले कदम

जिले में मानसूनी बारिश के बाद खेतों में कृषि कार्यों ने रफ्तार पकड़ ली है। धान की रोपाई तेज होने के साथ ही गन्ने की टॉप ड्रेसिंग तथा सब्जियों की फसलों में उर्वरक डालने का समय होने से यूरिया की मांग यकायक बढ़ गई है। मांग बढ़ने के कारण जिले की कई सहकारी समितियों और उर्वरक बिक्री केंद्रों पर किसानों की भीड़ उमड़ रही है। कई स्थानों पर किसान सुबह से लाइन में लग रहे हैं, लेकिन पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध न होने से उन्हें एक समिति से दूसरी समिति का चक्कर लगाना पड़ रहा है। धान की फसल के अलावा पहले से खड़ी गन्ने की फसल में टॉप ड्रेसिंग के लिए यूरिया डाला जा रहा है। इसके अलावा सब्जियों की खेती करने वाले किसान भी फसलों की बढ़वार के लिए यूरिया खरीद रहे हैं। एक साथ तीन प्रमुख फसलों में उर्वरक की आवश्यकता बढ़ने से बाजार और समितियों पर मांग कई गुना बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि समितियों पर पहुंचने के बाद पता चलता है कि यूरिया या डीएपी का स्टॉक समाप्त हो चुका है। कुछ स्थानों पर केवल सीमित मात्रा में खाद का वितरण किया जा रहा है, जबकि कई समितियों पर डीएपी और यूरिया दोनों उपलब्ध नहीं हैं। इससे किसानों को दूसरी समितियों या निजी दुकानों का सहारा लेना पड़ रहा है। समय पर खाद नहीं मिलने से धान की रोपाई और गन्ने की टॉप ड्रेसिंग प्रभावित होने की चिंता भी किसानों में बनी हुई है। वहीं कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वह अपनी वास्तविक आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरक खरीदें और फसलों में वैज्ञानिकों द्वारा अनुशंसित मात्रा में ही यूरिया एवं अन्य उर्वरकों का प्रयोग करें। किसी भी प्रकार की समस्या होने पर किसान संबंधित समिति, कृषि विभाग अथवा जिला स्तर पर स्थापित नियंत्रण कक्ष से संपर्क कर सकते हैं।

भविष्य की योजना

जिले में पर्याप्त खाद का भण्डार है। सचिवों की डिमांड के हिसाब से खाद उपलब्ध कराया जा रहा है। लगातार खाद की रैंक जिले को मिल रही है। किसानों को जरूरत के हिसाब से खाद की खरीदारी करनी चाहिए। सभी समितियों पर खाद उपलब्ध होने के साथ लगातार भेजवाई जा रही है।

नीरज गोंड, उपायुक्त सहकारिता एवं निबंधन कुशीनगर

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जिले में खाद की डिमांड क्यों बढ़ी है?
जिले में मूसलाधार बारिश के बाद किसानों में यूरिया खाद की डिमांड यकायक बढ़ गई है।
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