गैस वितरण के नए नियम से संचालक परेशान, डीएम से मिलने की तैयारी

Apr 06, 2026 10:15 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, कुशीनगर
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Kushinagar News - कुशीनगर में रसोई गैस सिलेंडर के वितरण को लेकर नए डीएसी नंबर के नियम ने एजेंसी संचालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब केवल डीएसी नंबर पर ही सिलेंडर दिए जा रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं को समस्या हो रही है। एजेंसी संचालक इस मुद्दे को लेकर डीएम से मिलकर समाधान की कोशिश कर रहे हैं।

गैस वितरण के नए नियम से संचालक परेशान, डीएम से मिलने की तैयारी

कुशीनगर। रसोई गैस सिलेंडर के वितरण को लेकर आयल कंपनियों द्वारा जारी किए गए नए निर्देशों ने गैस एजेंसी संचालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब सिलेंडर का वितरण केवल डीएसी (डिजिटल ऑथेंटिकेशन कोड) नंबर के आधार पर ही किए जाने की अनिवार्यता लागू कर दी गई है। इस व्यवस्था से, जहां उपभोक्ताओं को सुविधा मिलने की बात कही जा रही है, वहीं एजेंसी संचालकों में इसे लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है। इस समस्या को लेकर एजेंसी संचालको का कहना है कि डीएम से मुलाकात अपनी समस्याएं रखेंगे। इंडियन आयल के एरिया मैनेजर रवि चंदेरिया के अनुसार सरकार के निर्देश पर गैस वितरण व्यवस्था को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के लिए डीएसी नंबर पर ही सिलेंडर देने की व्यवस्था लागू की गई है।

उनका कहना है कि इससे उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध होगी और अनियमितताओं पर रोक लगेगी। हालांकि एजेंसी संचालकों का कहना है कि यह नियम व्यवहारिक रूप से उनके लिए परेशानी का कारण बन गया है। पहले जहां 75 प्रतिशत सिलेंडर कार्डधारकों को और 25 प्रतिशत अन्य उपभोक्ताओं को दिए जाते थे, वहीं अब बिना डीएसी नंबर के किसी को भी सिलेंडर नहीं दिया जा सकता। संचालकों का कहना है कि क्षेत्र में कई ऐसे प्रभावशाली लोग-जैसे जनप्रतिनिधि, पुलिसकर्मी और अधिकारी-बिना कनेक्शन के भी सिलेंडर लेते रहे हैं। ऐसे में नये नियम के तहत यदि उन्हें सिलेंडर नहीं दिया जाता है, तो टकराव की स्थिति बन सकती है और यदि दिया जाता है तो एजेंसी पर भारी जुर्माने का खतरा रहता है। इसके अलावा कई उपभोक्ताओं को भी परेशानी हो रही है, क्योंकि उनका डीएसी नंबर समय पर प्राप्त नहीं हो पा रहा है। ऐसे में वे सिलेंडर लेने से वंचित हो रहे हैं। एजेंसी संचालकों ने यह भी बताया कि बैकलॉग लगातार बढ़ता जा रहा है और काम का दबाव बढ़ने के कारण स्थिति तनावपूर्ण होती जा रही है। कार्य समय के बाद भी सिलेंडर के लिए फोन कॉल आ रहे हैं। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में राजनीतिक दबाव भी बढ़ गया है, जहां संभावित प्रत्याशी और स्थानीय नेता जनता को संतुष्ट करने के लिए एजेंसियों पर अतिरिक्त दबाव बना रहे हैं। संचालकों का कहना है कि यदि इस व्यवस्था में व्यावहारिक सुधार नहीं किया गया तो कामकाज करना और कठिन हो जायेगा।

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