
मकर संक्रांति 15 को, तैयारी में जुटे लोग
Kushinagar News - कुशीनगर में मकरसंक्रांति का पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा, जिसके बाद धार्मिक अनुष्ठान और स्नान का महत्व बढ़ जाएगा। तिल और खिचड़ी का दान इस दिन विशेष माना जाता है। उत्तरायण के स्वागत के लिए इस पर्व को श्रद्धा पूर्वक मनाना सामाजिक एकता को बढ़ावा देता है।
कुशीनगर। जिले में मकरसंक्रांति का पर्व 15 जनवरी दिन गुरूवार को मनाया जायेगा। इसकी तैयारी में लोग जुटे हुये हैं। सूर्य के उत्तरायण होने पर धार्मिक अनुष्ठान आदि कार्यक्रम शुरू हो जायेंगे। खिचड़ी पर तिल का दान समेत स्नान व दान करने का विशेष महत्व है। महर्षि पाराशर ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य पं राकेश पाण्डेय ने बताया कि मकर संक्रान्ति पुण्यकाल 15 जनवरी दिन गुरुवार को मनाया जाएगा, क्यों की 14 जनवरी दिन बुधवार को रात्रि में 09.20 पर सूर्य मकर राशि पर प्रवेश करेंगे। सूर्यास्त के बाद जिस दिन सूर्य राशि परिवर्तन करते है, तब मकर संक्रांति का पुण्य काल अगले दिन मनाया जाता है।
अतः इस वर्ष 15 जनवरी दिन गुरुवार को ही मकर संक्रान्ति का पर्व मनाना शुभ होगा। इसे लोग अपनी भाषा में खिचड़ी कहते है। मेषा आदि 12 राशियों में सूर्य के परिवर्तन काल को संक्रान्ति कहा जाता है। अतः किसी भी संक्रान्ति के समय स्नान, दान, जप, यज्ञ का विशेष महत्व है। पृथ्वी के मकर राशि में प्रवेश को मकर संक्रान्ति कहते है। सूर्य का मकर रेखा से उत्तरी कर्क रेखा कि ओर जाना उत्तरायण तथा कर्क रेखा से दक्षिणी रेखा की ओर जाना दक्षिणायन कहते है। उत्तरायण में दिन बड़े हो जाते हैं। प्रकाश बढ़ जाता है। राते दिन की अपेक्षा छोटी होने लगती है। दक्षिणायन में इसके ठीक विपरीत होता है। शास्त्रों के अनुसार उत्तरायण की अवधि देवताओं का दिन तथा दक्षिणायन की रात्रि है। वैदिक काल में उत्तरायण को देवयान तथा दक्षिणायन को पितृयान कहा जाता है। मकर संक्रान्ति के दिन यज्ञ में दिए गए द्रव्य को ग्रहण करने के लिए देवता पृथ्वी पर अवतरित होते हैं। इस मार्ग से पुण्यात्मायें शरीर छोड़कर स्वर्ग आदि लोकों में प्रवेश करती हैं। इस लिए यह आलोक का अवसर माना जाता है। धर्म शास्त्रों के कथनानुसार इस दिन पुण्य, दान, जप तथा धार्मिक अनुष्ठानों का अत्यन्त महत्व है। इस अवसर पर किया गया दान पुनर्जन्म होने पर सौ गुना होकर प्राप्त होता है। इस पर्व पर तिल का विशेष महत्व है। तिल खाना तथा तिल बांटना इस पर्व की प्रधानता है। शीत के निवारण के लिए तिल, तेल तथा तूल का महत्व है। तिल मिश्रित जल से स्नान, तिल- उबटन, तिल-हवन, तिल-भोजन तथा तिल-दान सभी कार्य पापनाशक है। इस लिए इस दिन तिल, गुड़ तथा चीनी मिले लड्डू खाने और दान देने का विशेष महत्व है। मकर संक्रान्ति से एक दिन पूर्व हिमांचल, हरियाणा व पंजाब में यह त्योहार लोहड़ी के रूप में मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश में यह मकर संक्रान्ति ( खिचड़ी ) के रूप में मनाया जाता है। इस दिन खिचड़ी खाने और खिचड़ी -तिल के दान का विशेष महत्व है। इस अवसर पर गंगा सागर में बहुत बड़ा मेला लगता है। मकर संक्रान्ति का पर्व श्रद्धा पूर्वक मनाने से सामाजिक एकता और अनन्त पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

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