
हिंसक जानवरों की दहशत में ग्रामीण, वन विभाग के हाथ खाली
Kushinagar News - कुशीनगर में बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से निकलकर तेंदुआ और अन्य हिंसक जानवरों ने आबादी में आतंक मचा रखा है। वन विभाग के पास संसाधनों की कमी के कारण जानवरों को पकड़ने में कठिनाई हो रही है। तेंदुआ कई लोगों को जख्मी कर चुका है, लेकिन वन विभाग को सफलता नहीं मिल रही है।
कुशीनगर। जिले की सीमा से सटे बिहार राज्य के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से निकलकर बाघ, तेंदुआ सहित अन्य हिंसक जानवर आबादी में पहुंचकर उत्पात मचा रहे हैं। करीब एक पखवारे से तेंदुए का आतंक छाया हुआ है, लेकिन वन विभाग के पास अत्याधुनिक संसाधन न होने के कारण हाथ खाली रह जा रहे हैं। क्षेत्रवासियों ने इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की मांग की है। जनपद की सीमा से सटा बिहार राज्य का वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) नेपाल के चितवन प्राणि उद्यान एवं महराजगंज के सोहगीबरवा वन्य जीव अभ्यारण से जुड़ा है। वीटीआर में रहने वाले जानवर इन जंगलों में विचरण करते रहते हैं, लेकिन शिकारियों की सक्रियता, वन माफियाओं की तरफ से इन जंगलों में पेड़ों की कटान कराने और इन जंगलों में इंसानी दखल के चलते वन्य जीव न केवल आबादी की तरफ भाग आते हैं, बल्कि आक्रामक भी हो जाते हैं।
इसकी वजह से पूर्व में कई बार बाघ, तेंदुआ, गैंडा, हाथी सहित अन्य हिंसक जानवर आबादी में आकर ग्रामीणों तथा उनके मवेशियों पर हमला कर चुके हैं। इधर, एक पखवारे से तेंदुआ का आतंक छाया हुआ है। कई लोगों का जख्मी कर चुका यह तेंदुआ चार दिन पहले खड्डा तहसील क्षेत्र के सिसवा गोपाल के सरेह में देखा गया था। वह गन्ने के खेत में तार में फंसा हुआ था। सूचना पर कुशीनगर एवं महराजगंज जिले के वन विभाग की संयुक्त टीम ने पकड़ने के लिए जाल बिछाया था। तेंदुआ जाल में फंस भी गया था, लेकिन जाल फटा होने के कारण दो व्यक्तियों को जख्मी कर भाग गया था। तब से वन विभाग की टीम उसे पकड़ने के लिए अभी तक कोशिश कर रही है, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी है। वन विभाग का दावा है कि तेंदुआ खेतों से होते हुए निचलौल के तरफ जंगलों में चला गया है। सूत्रों की मानी जाए तो वन विभाग के पास जितने संसाधन एवं मैनपॉवर है, वह आवश्यकता से बहुत कम है। ऐसे में हिंसक वन्य जीवों को पकड़ पाना बहुत मुश्किल हो रहा है। ---- कौन-कौन संसाधन उपलब्ध हैं वन विभाग के पास- कुशीनगर डीएफओ के मुताबिक वन विभाग के पास हिंसक वन्य जीवों को पकड़ने के लिए चार पिंजड़े, ढुलाई के लिए दो पिंजड़े, छह जाल, दो खाबड़ छोटे जाल, 10 हेलमेट, 10 चेस्ट गार्ड, 25 डंडे और एक ड्रोन उपलब्ध है। इसके अलावा जिले में वन विभाग के डीएफओ, एक एसडीओ, चार रेंजर व चार डिप्टी रेंजर सहित 58 अधिकारियों-कर्मचारियों का स्टॉफ है। 61 ऑफरोल न्यूनतम वेतनभोगी कर्मचारी भी हैं। इन्हीं के सहारे हिंसक वन्य जीवों का पकड़ना होता है। नतीजतन कई-कई दिन तक कांबिंग के बाद भी हिंसक जानवर पकड़ में नहीं आ पाते। हिंसक वन्य जीवों को पकड़ने के लिए कुछ संसाधन उपलब्ध हैं। जब भी जनपद में तेंदुआ, बाघ या अन्य किसी हिंसक जानवर के आबादी में आने की सूचना मिलती है। विभागीय टीम भेजकर उन जानवरों को पकड़ने का प्रयास किया जाता है। तेंदुआ खड्डा तहसील क्षेत्र में पकड़ा गया था, लेकिन महराजगंज टीम की तरफ से लाया गया जाल फटा होने के कारण भाग गया था। अभी भी पकड़ा नहीं जा सका है। वरुण कुमार सिंह, डीएफओ

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




