ईट भट्ठों पर मजदूरों की किल्लत, आधुनिक मशीन से हो रही ईंट की पथाई

Newswrap हिन्दुस्तान, कुशीनगर
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Kushinagar News - कुशीनगर के सुकरौली क्षेत्र में मजदूरों की कमी के कारण ईंट भठ्ठा संचालकों को संकट का सामना करना पड़ रहा है। कई भठ्ठे बंद होने की कगार पर हैं। इसके समाधान के लिए, कुछ भठ्ठों ने आधुनिक मशीनों से ईंट निर्माण शुरू कर दिया है, जिससे ईंटों की साइज और मोटाई में समानता आ रही है, और निर्माण लागत में कमी आ रही है।

ईट भट्ठों पर मजदूरों की किल्लत, आधुनिक मशीन से हो रही ईंट की पथाई

कुशीनगर। सुकरौली क्षेत्र के ईंट भठ्ठों पर तेजी से बढ़ रही मजदूरों की किल्लत से ईट भट्ठा संचालकों के सामने संकट आ गया है। मजदूरों की किल्लत से अधिकतर ईट भट्ठे बंदी के कगार पर हैं। विकल्प के तौर पर क्षेत्र के कुछ ईट भट्ठे आधुनिक मशीनों से ईट निर्माण शुरु कर दिये हैं। भवन निर्माण से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि मशीन से निर्मित ईंट की साइज व मोटाई का लेवल समतल होने के चलते ईंट मजबूत व टिकाऊ होते हैं। सुकरौली क्षेत्र में लगभग दो दर्जन ईट भट्ठा हैं। वर्तमान समय में इन ईट भट्ठों पर ईंट निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है।

वहीं वर्तमान समय में कृषि कार्य जैसे, सरसो, मटर, गेहूं की फसल का कटाई व मड़ाई कार्य भी तेजी से चल रहा है, जिसका परिणाम है कि ईट भट्ठों पर मजदूरों की कमी हो गयी है। इसके विकल्प में ईट भट्ठा संचालक आधुनिक मशीनों से ईंट निर्माण का कार्य शुरू कर दिया। मकान निर्माण से विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक मशीन से बना ईंट हाथ से बने ईंटों के मुकाबले साइज व मोटाई बराबर होती है, जिससे भवन की चुनाई में सीमेंट व बालू का खर्च कम लगता है। प्लास्टर के समय कम सीमेंट व बालू में दीवाल का प्लास्टर सही ढ़ग से होता है। जबकि हाथों से बनाई गई ईंट का साइज व मोटाई भिन्न होने के चलते सीमेंट व बालू की मात्रा अधिक लगती है।

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