शादी विवाह में कॉमर्शियल गैस के लिए 80 से अधिक आवेदन
Kushinagar News - कुशीनगर में शादी-विवाह के सीजन में रसोई गैस की किल्लत को देखते हुए जिला प्रशासन ने नई व्यवस्था लागू की है। अब आयोजनों के लिए अलग से कमर्शियल गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पिछले दो दिनों में 80 से अधिक आवेदन आए हैं, और शादी कार्ड के साथ प्रार्थना पत्र देकर गैस की मांग की जा रही है।

कुशीनगर। शादी-विवाह में रसोई गैस की किल्लत और उपभोक्ताओं की परेशानी को देखते हुए जिला प्रशासन ने नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत आयोजनों के लिए अब अलग से कमर्शियल गैस सिलेंडर उपलब्ध जा रहे हैं। बीते दो दिनों में ही जिला पूर्ति अधिकारी कार्यालय में कॉमर्शियल गैस के लिए 80 से अधिक आवेदन पहुंच चुके हैं। बड़ी संख्या में लोग स्वयं कार्यालय पहुंचकर गैस उपलब्ध कराने के लिये शादी कार्ड के साथ प्रार्थना पत्र देकर मांग कर रहे हैं, जिसे विभाग द्वारा संबंधित गैस कंपनियों को लेटर जारी कर तय तिथि पर कॉमर्शियल गैस उपलब्ध कराया जा रहा है।जिले
में गैस की किल्लत शादी-विवाह के सीजन को देखते हुये बीते दिनों डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने एलपीजी कंपनियों के सेल्स ऑफिसरों के साथ बैठक कर अलग से कमर्शियल गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने के निर्देश दियें थे। इस फैसले के बाद शादी विवाह व अन्य आयोजनों के लिये कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की मांग तेजी से बढ़ गई है। डीएसओ कृष्ण गोपाल पांडेय ने बताया कि शादी-विवाह में भोजन व्यवस्था के लिए कॉमर्शियल गैस की आवश्यकता को देखते हुए विशेष व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए आवेदक को प्रार्थना पत्र में संबंधित गैस एजेंसी का नाम, पता गैस की संख्या व कार्यक्रम आदि लिख कर कार्यक्रम से संबंधित कार्ड और लेखपाल से सत्यापन कराकर कुछ दिन पूर्व एसडीएम या जिला पूर्ति कार्यालय में देना होगा। उन्होंने कहा कि इसके लिये प्रति सिलेंडर 2400 रुपये संबंधित एजेंसी में सिक्योरिटी मनी जमा करने पर सिलेंडर मिलेगा, जो खाली सिलेंडर वापसी के समय लौटा दिया जायेगा। डीएसओ ने बताया कि प्राप्त आवेदनों के आधार पर संबंधित गैस एजेंसियों को तिथिवार सिलेंडर उपलब्ध कराने के निर्देश दिये जा रहे हैं, ताकि किसी भी आयोजन में बाधा न आये। कोशिश की जा रही है कि निर्धारित तारीख से पहले ही आवेदकों को गैस मिल जाये। विभाग ने आवेदन प्रक्रिया को भी स्पष्ट कर दिया है। कॉमर्शियल गैस प्राप्त करने के लिए आवेदन के साथ शादी का कार्ड लगाना अनिवार्य किया गया है। इससे फर्जी मांग पर रोक लगाने में मदद मिल रही है और वास्तविक जरूरतमंदों को प्राथमिकता दी जा रही है।
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