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गन्ना के साथ मटर की खेती किसान होंगे लाभान्वित

गन्ना के साथ मटर की खेती किसान होंगे लाभान्वित

संक्षेप:

Kushinagar News - कुशीनगर, हिटी। जिले के किसान शरदकालीन गन्ने के साथ सब्जी मटर की सहफसली खेती

Dec 08, 2025 10:46 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, कुशीनगर
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कुशीनगर, हिटी। जिले के किसान शरदकालीन गन्ने के साथ सब्जी मटर की सहफसली खेती करके एकड़ में 70 से 80 हजार रूपये अतिरिक्त आमदनी कर सकते हैं। मटर की फली 100 से 110 दिन तैयार हो जाती है। एक एकड़ गन्ने में 20 से 25 कुंतल हरी फली पैदा होती है। इससे औसतन 30 से 40 रुपये प्रति किलो बेचने पर 70 से 80 हजार की आमदनी होगी। उप्र गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केन्द्र पिपराइच गोरखपुर के पूर्व सहायक निदेशक गन्ना विशेषज्ञ ओमप्रकाश गुप्ता ने ग्राम बकनहा में किसान चौपाल में बताया कि किसानों को गन्ने के साथ सब्जी मटर की खेती का फोटोग्राफ दिखाकर उसके लाभ के बारे में बताया।

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उन्होंने गन्ने की खेती को लाभकारी बनाने तथा उत्पादन लागत को कम करने, किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में गन्ने के साथ सहफसली खेती का विशेष ध्यान देने पर जोर दिया। बताया कि सब्जी मटर की प्रमुख प्रजातियों में अरक्लि, आजाद मटर-3, मालवीय मटर-15, गोल्डेन, हरित आदि शामिल हैं। गन्ने की बुवाई 120 सेमी की दूरी पर नाली बनाकर करें। गन्ने की दो पंक्तियों के बीच 2 से 3 पंक्ति में मटर की बुवाई करें। मटर की पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30 सेमी रखें। मटर की फसल को बीज जनित एवं रोग से बचाव के लिए 4 ग्राम ट्राइकोडर्मा या ढाई ग्राम थीरम प्रति किग्रा बीज की दर से बुवाई से पहले शोधित करना चाहिए। एक एकड़ गन्ने में सब्जी मटर का 25 किग्रा की बीज की आवश्यकता होती है। बीज को राईजोबियम कल्चर मात्रा 10 किग्रा बीज के लिए 200 ग्राम एक पैकेट से उपचारित करना बहुत ही लाभकारी है। एक एकड़ सब्जी मटर के लिए गन्ने के अतिरिक्त अलग से उर्वरक 50 किग्रा डीएपी, 20 किग्रा म्यूरेट आफ पोटाश तथा 5 किग्रा सल्फर-सोटा- 80 प्रतिशत प्रयोग करें। अंतिम जुताई के समय 50 कुन्तल गोबर की सड़ी खाद, 5 किग्रा ट्राइकोडर्मा का प्रयोग करें। बुवाई के 20 से 25 दिन पर निराई गुड़ाई करें। आवश्यकतानुसार हल्की सिंचाई करें। किसान अपनी सुविधानुसार गन्ने में मटर, लोबिया, चना, मसूर की सहफसली खेती कर सकते हैं। इससे खरपतवार नियंत्रित होगा और खेत को हरी खाद प्राप्त होगी। जड़ो में गांठ होती है, जो वायुमण्डल से नाइत्रोजन लेकर भूमि को उपलब्ध कराती है। गन्ने के साथ दलहनी फसलों की खेती मौजूदा समय की मांग है।