Kushinagar News: बारिश में सांपों का खतरा बढ़ा, 36 घंटे में पहुंचे 30 स्नेक बाइट के मरीज
Kushinagar News: कुशीनगर में बरसात के कारण स्नेक बाइट के मामलों में तेजी आई है। खेतों में पानी भरने के कारण सांप रिहायशी इलाकों में आ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में 36 घंटे में 30 मरीज पहुंचे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सावधानी बरतना आवश्यक है क्योंकि मामले बढ़ने की आशंका है।

Kushinagar News: कुशीनगर, मिथिलेश द्विवेदी। बरसात के साथ जिले में स्नेक बाइट (सर्पदंश) के मामलों में तेजी से इजाफा होने लगा है। खेतों में पानी भरने और बिलों में पानी जाने के कारण सांप रिहायशी इलाकों की ओर निकल रहे हैं। इसका असर मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भी देखने को मिल रहा है। स्वशासी मेडिकल कॉलेज में बीते 36 घंटे के भीतर स्नेक बाइट के 30 मरीज इलाज के लिए पहुंचे। राहत की बात यह है कि मेडिकल कॉलेज में उपचार के लिए करीब पांच हजार वायल एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) उपलब्ध है।
स्नेक बाइट के मामले
मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अनुसार, 20 मई से 20 जून के बीच स्नेक बाइट के 255 मरीज इलाज के लिए पहुंचे थे। अब लगातार हो रही बारिश के बाद मामलों में और तेजी आने लगी है। विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई और अगस्त में यह संख्या और बढ़ सकती है, इसलिए लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। बारिश के दौरान खेतों, झाड़ियों, लकड़ी और भूसे के ढेर, जलभराव वाले स्थानों तथा घरों के आसपास सांपों के निकलने की संभावना अधिक रहती है। ऐसे में किसानों, मजदूरों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। मेडिसिन विभाग डॉ. उपेंद्र चौधरी का कहना है कि सांप काटने के बाद घबराने के बजाय मरीज को जल्द से जल्द नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचाना चाहिए। झाड़फूंक, ताबीज या घरेलू उपचार के चक्कर में समय गंवाना जानलेवा साबित हो सकता है। समय पर एंटी स्नेक वेनम मिलने से अधिकांश मरीजों की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि सांप काटने पर मरीज को शांत रखें और अधिक चलने-फिरने न दें। प्रभावित अंग को स्थिर रखें, लेकिन बहुत कसकर कपड़ा या रस्सी न बांधें। जड़ी-बूटी, चीरा लगाने या जहर चूसने जैसी गलत विधियां बिल्कुल न अपनाएं। जितनी जल्दी संभव हो मरीज को मेडिकल कॉलेज या नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं। यदि संभव हो तो सांप का रंग या पहचान याद रखें, लेकिन उसे पकड़ने का प्रयास न करें। उन्होंने बरसात दिनों में बचाव की जरूरी सलाह साझा की है। उनका कहना है कि रात में टॉर्च का उपयोग करके ही बाहर निकलें। खेतों में काम करते समय लंबे जूते और दस्ताने पहनें। घर के आसपास झाड़ियां, कचरा और जलभराव न होने दें। जमीन पर सोने से बचें तथा बच्चों को खुले स्थानों पर नंगे पैर न चलने दें। साथ ही अनाज, भूसा और लकड़ी के ढेर में हाथ डालने से पहले सावधानी बरतें।
मेडिकल कॉलेज की स्थिति
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मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. दिलीप कुमार ने बताया कि इमरजेंसी में स्नेक बाइट के मरीजों के इलाज की पूरी व्यवस्था है। पर्याप्त मात्रा में एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध है और प्रशिक्षित चिकित्सकों की निगरानी में मरीजों का उपचार किया जाता है। इधर स्नेक बाइट के मामले बढ़े हैं। फिलहाल पांच हजार वायल एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध है।
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