सराफा बाजार में मंदी गहराई तो जुड़े उद्योगों पर भी पड़ेगा असर

हिन्दुस्तान, कुशीनगर
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कुशीनगर में आभूषण कारोबारियों का कहना है कि पीएम मोदी की अपील के बाद सोने की मांग में गिरावट से जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। बिक्री में कमी से रिटेल और अन्य क्षेत्रों में गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं, जिससे रोजगार संकट बढ़ सकता है।

सराफा बाजार में मंदी गहराई तो जुड़े उद्योगों पर भी पड़ेगा असर

कुशीनगर। निज संवाददाता आभूषण कारोबारियों का कहना है कि पीएम मोदी की अपील के बाद सोने की मांग में यदि गिरावट आती है तो इसका प्रभाव सिर्फ आभूषण बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, पूरे जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर पर सीधे तौर से असर पड़ेगा। बिक्री घटने से रिटेल, डिजाइनिंग, लॉजिस्टिक्स, ई-कॉमर्स और फाइनेंस जैसे कई क्षेत्रों की गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती हैं।

प्रभावित होने वाले लोग

कारोबारियों का कहना है कि ऑर्डर कम होने की स्थिति में सबसे अधिक असर उन लोगों पर पड़ेगा, जिनकी रोजी-रोटी सीधे इस उद्योग से जुड़ी है। इसमें ज्वेलर्स के साथ पॉलिशिंग वर्कर, डिजाइनर, कास्टिंग यूनिट में काम करने वाले कर्मचारी और छोटे कारीगर शामिल हैं। काम घटने पर इन लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है और उन्हें दूसरे विकल्प तलाशने पड़ सकते हैं। वहीं, सराफा बाजार पहले से ही कुशल कारीगरों की कमी से जूझ रहा है। नई पीढ़ी अब इस पेशे की ओर कम आकर्षित हो रही है और दूसरे व्यवसायों को प्राथमिकता दे रही है। पुराने कारीगर उम्र बढ़ने के साथ इस काम से दूरी बना लेते हैं। कारोबारियों का कहना है कि आभूषण निर्माण में बेहद बारीक और सूक्ष्म कार्य करना पड़ता है। 45 वर्ष की आयु के बाद आंखों की रोशनी कमजोर होने लगती है। इससे लंबे समय तक इस पेशे में टिके रहना कठिन हो जाता है। ऐसे में अगर बाजार में मंदी और बढ़ी तो पारंपरिक कारीगरी पर भी असर पड़ सकता है।

बाजार की स्थिति

बोले आभूषण कारोबारी :

शादी-विवाह के कारण बाजार पूरी तरह प्रभावित नहीं हुआ है, लेकिन ग्राहक अब भारी गहनों से दूरी बनाकर कम वजन और बजट के हिसाब से आभूषण खरीद रहे हैं।

-ऋषि प्रताप वर्मा

पीएम मोदी के अपील का असर तो अभी नहीं दिख रहा है। अगर सोने की मांग घटी तो इसका असर सिर्फ दुकानों पर ही नहीं, कारीगरों व डिजाइनरों की रोजी-रोटी पर भी पड़ेगा।

-सुरेश चंद वर्मा

छोटे शो-रूम पर कर्मचारियों से लेकर रख-रखाव समेत अन्य खर्च हर महीने ढाई से तीन लाख रुपये तक आता है। 40 से 45 लाख रुपये प्रतिमाह का कारोबार हो, तभी इसकी भरपायी हो पाती है।

-राजेश उर्फ राजू जायसवाल

बाजार में इस समय सिर्फ 10 फीसदी कारोबार ही बच गया है। ऐसे में अगर सोने की मांग घटती है तो छोटे कारीगरों और आभूषण निर्माताओं के सामने काम और आय का संकट गहरा जाएगा।

-रवि वर्मा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम मोदी की अपील का आभूषण कारोबार पर क्या असर पड़ेगा?
यदि सोने की मांग में गिरावट आती है तो इसका प्रभाव आभूषण बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, पूरे जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर पर असर पड़ेगा।
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