होलिका दहन आज, होली चार मार्च को

Mar 02, 2026 09:58 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, कुशीनगर
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Kushinagar News - कुशीनगर में होलिका दहन सोमवार की रात 11.55 से 12.52 बजे के बीच होगा, जबकि होली 4 मार्च को मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्य पं. राकेश पाण्डेय के अनुसार, होली एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक त्योहार है, जो मानव का परमात्मा से साक्षात्कार कराता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

होलिका दहन आज, होली चार मार्च को

कुशीनगर। होलिका दहन सोमवार की आधी रात बाद होगी। वहीं होलिकोत्सव ( होली) 4 मार्च दिन बुधवार को सर्वत्र मनाई जाएगी। मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए देवाधिदेश भगवान शिव का पूजन करना लाभकारी होता है। महर्षि पराशर ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य पं. राकेश पाण्डेय ने बताया कि होली सनातन धर्म का एक विशिष्ट सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक त्योहार है। आध्यात्म का अर्थ है मनुष्य का ईश्वर से सम्बन्ध होना या स्वयं का स्वयं के साथ सम्बंधित होना है। इस लिए होली मानव का परमात्मा से एवं स्वयं से स्वयं के साक्षात्कार का पर्व है। होली रंगों का त्योहार है। रंग सिर्फ प्रकृति और चित्रों में ही नहीं हमारी आंतरिक ऊर्जा में भी छिपे होते हैं।

बताया कि होलिका दहन सोमवार को रात्रि में 11.55 से 12.52 बजे के मध्य किया जाएगा, क्यों कि 2 मार्च को सायं काल से ही भद्रा प्रारम्भ हो रही है। भद्रा में होलिका दहन नहीं किया जाता है, परन्तु धर्मशास्त्रानुसार भद्रा के पुच्छ भाग में होलिका दहन शुभ माना गया है, जो कि सोमवार को रात्रि 11.55 से 12.52 बजे के बीच होलिका दहन करना शुभप्रद होगा। होलिकोत्सव (होली) 4 मार्च दिन बुधवार को सर्वत्र धूमधाम से होलिकोत्सव मनाया जाना शुभ प्रद है। बताया कि सोमवार की रात्रि में पहले से बनाई गयी होलिका के पास दक्षिण दिशा में एक कलश रखकर पंच देवताओं की पूजा कर ॐ होलिकायै नमः मन्त्र पढ़ते हुए होलिका का भी पञ्चोपचार पूजन करके उनका दहन करें। होली के दिन अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग प्रकार से इसके मनाने का विधान है, परन्तु सर्व सम्मत से अपने से बड़े व छोटे सबको अबीर, गुलाल लगाकर प्रणाम करना, गले मिलना व मिठाई बांटने की परम्परा साथ ही रंग भी एक दूसरे के ऊपर डालने का विधान है, जो प्रेम सौहार्द व आत्मीयता का प्रतीक है। यह पर्व हिरण्यकश्यप की बहन होलिका के मरने के बाद से मनाया जाता है। यह सत्य की विजय व अत्याचारी के दमन का प्रतीक है। बताया कि मनोकामना पूर्ति के लिए महादेव की आराधना से हमें मनोवांछित फल मिलता है, किन्तु होली के दिन भगवान महादेव की पूजा करने से व्यक्ति की सभी इच्छाएं पूर्ण होती है। विवाह में आ रहे अवरोध के लिए होली के दिन सुबह एक साबुत पान के पत्ते पर साबुत सुपारी तथा हल्दी की गांठ रख कर शिवलिंग पर चढ़ाएं और बिना पीछे मुड़कर देखे वापस घर लौट जाएं। अगले दिन भी इसी प्रयोग को करें, इससे जल्द ही विवाह का योग बनता है।

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