Kushinagar News: निजी अस्पतालों की खंगाली जा रही कुंडली, पहले दिन 52 अस्पतालों की हुई जांच
Kushinagar News: कुशीनगर में निजी अस्पतालों की स्वास्थ्य सुविधाओं की जांच की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने 8 टीमें बनाई हैं जो 52 अस्पतालों का निरीक्षण कर रही हैं। कई अस्पतालों में मानकों की कमी पाई गई है, और गंभीर अनियमितताओं की पहचान की गई है। जरूरी कार्रवाई की जाएगी।

Kushinagar News: कुशीनगर, मिथिलेश द्विवेदी। जिले में संचालित निजी अस्पतालों की अब स्वास्थ्य विभाग की टीमें कुंडली खंगाल रही हैं। अस्पतालों में मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं, पंजीकरण समेत निर्धारित मानकों की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग ने आठ टीमें गठित की हैं। डीएम महेंद्र सिंह तंवर के निर्देश पर सीएमओ डॉ. चंद्रप्रकाश ने इन टीमों को जिम्मेदारी सौंपी है। पहले दिन दो ब्लॉकों पडरौना और कसया में संचालित 52 निजी अस्पतालों का निरीक्षण किया गया। इनमें पडरौना ब्लॉक के 27 और कसया के 25 अस्पताल शामिल हैं। जांच के दौरान कई अस्पतालों में मानकों से जुड़ी कमियां सामने आई हैं。
जिले में निजी अस्पतालों का संचालन
जिले में बड़ी संख्या में निजी अस्पताल, पैथालॉजी और अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालित हो रहे हैं। इनके संचालन में निर्धारित नियमों और मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी पड़ताल के लिए सभी 14 ब्लॉकों में जांच कराई जानी है। गठित टीमें अस्पतालों का भौतिक सत्यापन करने के साथ पंजीकरण, चिकित्सकों की उपलब्धता, मरीजों के उपचार की व्यवस्था, भवन, अग्निशमन सुरक्षा, बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण और आवश्यक अभिलेखों की भी जांच कर रही हैं। सोमवार को पडरौना और कसया ब्लॉक के 52 अस्पतालों के निरीक्षण में सामने आए तथ्यों ने स्वास्थ्य विभाग को कई स्तर पर कमियों की जानकारी दी है। जांच किए गए अस्पतालों में 12 अस्पताल आयुष्मान योजना से आच्छादित पाए गए। टीमों ने अस्पतालों में चिकित्सकों की उपलब्धता और उनके पंजीकरण की भी पड़ताल की। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि जिन अस्पतालों के संचालक स्वयं चिकित्सक हैं, उनमें करीब 75 फीसदी अस्पतालों में व्यवस्थाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप मिलीं। वहीं, जिन अस्पतालों के संचालक चिकित्सक नहीं हैं, उनमें कई जगह चिकित्सकों की नियमित मौजूदगी नहीं मिली। ऐसे अस्पतालों को चिह्नित किया गया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इन अस्पतालों के संचालकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब करने की तैयारी है। टीमों ने कुछ अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन और फायर एनओसी से संबंधित कमियां भी पकड़ी हैं। कुछ अस्पतालों में फायर एनओसी की अवधि समाप्त हो चुकी है। ऐसे मामलों को भी रिपोर्ट में शामिल किया जा रहा है। मरीजों की सुरक्षा से जुड़े इन मामलों को गंभीरता से लिया जाएगा। सीएमओ डॉ. चंद्रप्रकाश ने बताया कि सोमवार को पडरौना और कसया ब्लॉक में 52 अस्पतालों का निरीक्षण किया गया है। टीमों द्वारा पाई गई कमियों का विस्तृत आकलन मंगलवार को किया जाएगा। इसके बाद रिपोर्ट डीएम को भेजी जाएगी। जिन अस्पतालों में मामूली या सुधार योग्य कमियां मिलेंगी, उन्हें नोटिस देकर जवाब मांगा जाएगा। उन्होंने बताया कि गंभीर अनियमितता पाए जाने वाले अस्पतालों को डीएम के संज्ञान में लाया जाएगा और आवश्यकता के अनुसार सील करने की कार्रवाई भी की जाएगी। नोटिस का जवाब संतोषजनक नहीं मिलने या निर्धारित मानकों का पालन नहीं किए जाने पर संबंधित अस्पताल के खिलाफ क्लिनिकल प्रतिष्ठान (पंजीकरण और विनियमन) अधिनियम, 2010 के तहत विधिक कार्रवाई की जाएगी। सीएमओ ने बताया कि जांच की प्रक्रिया जिले के सभी 14 ब्लॉकों में पूरी कराई जाएगी। आठों टीमें अपने-अपने क्षेत्रों में निजी अस्पतालों का निरीक्षण करेंगी। प्रत्येक दिन टीमों के साथ समीक्षा बैठक कर जांच की प्रगति और सामने आ रही कमियों की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मरीजों की सुरक्षा और मानक के अनुरूप इलाज सुनिश्चित करना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता है। निर्धारित मानकों की अनदेखी करने वाले किसी भी अस्पताल को बख्शा नहीं जाएगा।
मरीजों की फाइलों में मिलीं कई कमियां :
जांच के दौरान ज्यादातर अस्पतालों में भर्ती मरीजों की फाइल यानी बीएचटी की स्थिति भी संतोषजनक नहीं मिली है। कई अस्पतालों में मरीजों की भर्ती से संबंधित फाइलें या तो उपलब्ध नहीं थीं या फिर उन्हें पूरी तरह भरा नहीं गया था। कुछ फाइलों में ऑपरेशन करने वाले सर्जन के नोट्स और एनेस्थीसिया से संबंधित नोट्स भी अधूरे पाए गए। टीमों ने अस्पतालों के प्रवेश और निकास की व्यवस्था की भी जांच की। ज्यादातर अस्पतालों में प्रवेश और बाहर निकलने के लिए एक ही रास्ता पाया गया। एक-दो अस्पतालों में बेसमेंट में वार्ड संचालित होने की जानकारी भी सामने आई है। इन कमियों को भी स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में शामिल किया जा रहा है। जांच के दौरान ऐसे चिकित्सकों को भी चिह्नित किया जा रहा है, जिन्होंने एक से अधिक निजी अस्पतालों में अपना पंजीकरण करा रखा है। कुछ मामलों में एक ही सर्जन का पंजीकरण पांच या उससे अधिक अस्पतालों में पाया गया है। एनेस्थीसिया विशेषज्ञों से जुड़े पंजीकरण और उनकी उपलब्धता की भी जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संबंधित अस्पतालों में आवश्यकतानुसार विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध हैं या नहीं।


