1974 के बाद सराफा बाजार में आया बड़ा बदलाव

Newswrap हिन्दुस्तान, कुशीनगर
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कुशीनगर। 1968 और 1973-74 में सोने के लिए सरकार ने कड़े फैसले लिए थे, जिससे छोटे कारोबारी प्रभावित हुए। गोल्ड कंट्रोल एक्ट ने गहनों के निर्माण पर रोक लगाई, जबकि आज ग्राहक आकर्षक और हल्के गहनों की ओर बढ़ रहे हैं। अब बाजार अधिक संगठित है और ग्राहक डिजाइन और बजट को प्राथमिकता दे रहे हैं।

1974 के बाद सराफा बाजार में आया बड़ा बदलाव

कुशीनगर। साल 1968 और 1973-74 में भारत में सोने को लेकर सरकार ने कड़े फैसले लिए थे। इसकी वजह विदेशी मुद्रा संकट, बढ़ता आयात और आर्थिक दबाव था। शहर के पुराने सराफा कारोबारी राजेंद्र वर्मा का कहना है कि 1968 में लागू हुए गोल्ड कंट्रोल एक्ट और 1974 के तेल संकट के दौरान सराफा कारोबार ने कठिन दौर देखा है। उस समय 14 कैरेट से अधिक शुद्धता वाले गहनों के निर्माण पर रोक लगा दी गई थी और लाइसेंस व्यवस्था व कड़े नियमों के कारण छोटे कारोबारी बाजार से बाहर हो गए थे। कानूनी सप्लाई घटने से तस्करी और नकली सोने का कारोबार भी बढ़ चुका था। लेकिन, आज का बाजार पहले की तुलना में काफी बदल चुका है। पहले भारी गहनों की लोग डिमांड करते थे, क्योंकि सोने का भाव कम था। अब कीमतों में उछाल के बाद ग्राहक कम वजन और आकर्षक दिखने वाले आभूषणों की खरीदारी कर रहे हैं। कुछ साल पहले तक 18 कैरेट के गहनों को लेकर लोग रूचि नहीं दिखा रहे थे, लेकिन उसी कैरेट के गहने लोगों की पसंद बन चुके हैं।

पुराने सराफा कारोबारियों की स्थिति

वहीं, पुराने सराफा कारोबारी हरिनारायण वर्मा का कहना है कि 1968 में गोल्ड कंट्रोल एक्ट और 1973-74 में तेल संकट के दौरान गोल्ड कंट्रोल नियमों को लेकर हुई सख्ती के कारण उस दौर में जिन कारोबारियों के पास पूंजी थी, वही टिक पाए, जबकि छोटे ज्वेलर्स और कारीगरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया था। लेकिन, मौजूदा स्थिति पहले जैसी नहीं है। अब बाजार अधिक संगठित और ग्राहकों की जरूरत के अनुसार ढल चुका है। उन्होंने बताया कि आज ग्राहक वजन से ज्यादा डिजाइन और बजट को महत्व दे रहे हैं। परिवारों में परंपरा भी कायम है। पहले शादी में जितने गहने चढ़ाए जाते थे, आज भी उतनी संख्या में आभूषण खरीदे जा रहे हैं। हालांकि, उनका वजन पहले की तुलना में कम हो गया है।

सामान्य प्रश्न

गोल्ड कंट्रोल एक्ट कब लागू हुआ था?
गोल्ड कंट्रोल एक्ट 1968 में लागू हुआ था।

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