पीएम की अपील से सराफा कारोबारियों की बढ़ी चिंता, बाजार पर मंदी का साया
कुशीनगर के सराफा बाजार में व्यापारियों में बेचैनी का माहौल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोना खरीदने से बचने की अपील ने कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। ग्राहकों की संख्या में कमी और बढ़ती महंगाई के कारण कारोबार लगभग 10 फीसदी तक सिमट गया है। हल्के गहनों की मांग बढ़ रही है, लेकिन भविष्य को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।

कुशीनगर। निज संवाददाता जिले के सराफा बाजार में इन दिनों बेचैनी का माहौल है। पहले से ही कमजोर पड़े कारोबार के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील ने व्यापारियों की चिंता और बढ़ा दी है, जिसमें लोगों से एक साल तक सोना खरीदने से बचने की बात कही गई है। फिलहाल बाजारों में इसका सीधा असर दिखाई नहीं दे रहा है, लेकिन कारोबारी आने वाले दिनों को लेकर आशंकित हैं। उनका कहना है कि सोशल मीडिया के दौर में खास तौर से पीएम मोदी की अपील या संदेश का असर तेजी से फैलता है और इसका प्रभाव बाजार पर पड़ना तय माना जा रहा है।
बाजार की स्थिति
सराफा कारोबारियों का कहना है कि पहले से ही बाजार की स्थिति सामान्य नहीं है। बीते कुछ महीनों में ग्राहकों की संख्या में लगातार कमी आई है और वर्तमान में कारोबार लगभग 10 फीसदी तक सिमट कर रह गया है। त्योहारों और शादी-विवाह के सीजन में जिस बाजार में रौनक दिखाई देती थी, वहां अब ग्राहकों की आवाजाही पहले की तुलना कम हो गई है। बढ़ती महंगाई और आर्थिक दबाव के कारण लोग जरूरत के हिसाब से ही खरीदारी कर रहे हैं। ऐसे माहौल में यदि सोना खरीदने को लेकर लोगों में संकोच बढ़ा तो इसका सीधा असर कारोबार पर पड़ेगा।
शोरूम संचालन की चुनौतियाँ
पडरौना शहर के बड़े ज्वेलरी शो-रूम के संचालक अंशुमान बंका का कहना है कि आधुनिक सुविधाओं और बड़े सेटअप वाले शोरूम को चलाना अब आसान नहीं है। शो-रूम को संचालित करने के लिए हर महीने कम से कम दो से ढाई करोड़ रुपये का टर्नओवर जरूरी होता है। तभी कर्मचारियों का वेतन, बिजली बिल, सुरक्षा व्यवस्था, बैंक ब्याज, टैक्स और अन्य खर्चों के बाद कुछ मुनाफा निकल पाता है। कारोबार घटने की स्थिति में संचालन खर्च निकालना मुश्किल हो जाएगा।
छोटे और मध्यम दुकानदारों की समस्याएँ
वहीं, स्थानीय स्तर पर संचालित छोटे और मध्यम सराफा दुकानदार भी आर्थिक दबाव महसूस कर रहे हैं। कारोबारी राजेश उर्फ राजू जायसवाल के मुताबिक छोटे शो-रूम पर भी कर्मचारियों की सैलरी, बिजली, दुकान किराया और रख-रखाव समेत अन्य खर्च जोड़ने पर हर महीने करीब ढाई से तीन लाख रुपये तक खर्च आता है। इन खर्चों को संतुलित करने के लिए कम से कम 40 से 45 लाख रुपये प्रतिमाह का कारोबार जरूरी है, लेकिन मौजूदा हालात में यह लक्ष्य पूरा होना कठिन दिख रहा है। कारोबारियों का कहना है कि सोना सिर्फ आभूषण ही नहीं, भारतीय परिवारों की परंपरा और निवेश का महत्वपूर्ण हिस्सा भी रहा है। यदि बाजार की यही स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो सराफा कारोबार गहरे संकट में आ सकता है। कई दुकानदार पहले ही अपने खर्चों में कटौती करने लगे हैं। कुछ कारोबारी वैकल्पिक व्यवसाय की संभावनाओं पर भी विचार कर रहे हैं।
ग्राहकों की बदलती प्राथमिकताएँ
महंगे सोने ने बदली ग्राहकों की पसंद, हल्के गहनों की डिमांड बढ़ी
सराफा बाजार में सोने की बढ़ती कीमतों का असर अब ग्राहकों की पसंद और खरीदारी के तरीके पर साफ दिखाई देने लगा है। शादी-ब्याह का सीजन होने के बावजूद लोग अब जरूरत के हिसाब से ही गहनों की खरीदारी कर रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि पीएम मोदी की अपील का फिलहाल शादी वाले परिवारों पर कोई खास असर नहीं पड़ा है, क्योंकि विवाह जैसे आयोजनों में लोग अपनी परंपरा और जरूरत के अनुसार खरीदारी कर ही रहे हैं।
भविष्य की चिंता
हालांकि, बढ़ती कीमतों ने ग्राहकों का बजट जरूर प्रभावित किया है। पहले जहां लोग 15 से 16 ग्राम तक के भारी हार और अन्य आभूषण खरीदते थे तो वहीं अब अधिकांश ग्राहक पांच से छह ग्राम तक के हल्के हार को प्राथमिकता दे रहे हैं। बाजार में अब डिजाइन और आकर्षक लुक वाले कम वजन के गहनों की मांग तेजी से बढ़ी है। कारोबारी अंशुल जायसवाल व अरविंद वर्मा का कहना है कि सोने के दाम लगातार बढ़ने से ग्राहक विकल्प तलाशने लगे हैं। इसका असर 18 कैरेट के गहनों की मांग पर भी दिखाई दे रहा है। पहले ग्राहक 22 कैरेट के पारंपरिक आभूषणों को अधिक पसंद करते थे और 18 कैरेट के गहनों की बिक्री सीमित रहती थी। लेकिन अब कम वजन और कम कीमत के कारण 18 कैरेट के आधुनिक डिजाइन वाले आभूषण तेजी से बिक रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि ग्राहक अब बजट और जरूरत दोनों को ध्यान में रखकर खरीदारी कर रहे हैं। बाजार में भारी गहनों की जगह हल्के और स्टाइलिश आभूषणों का चलन लगातार बढ़ रहा है।
सहालग सीजन और संभावनाएँ
शहर के सराफा कारोबारियों का कहना है कि फिलहाल पीएम की अपील का असर बाजार में दिखाई नहीं दे रहा है, लेकिन आने वाले दिनों को लेकर व्यापारियों के बीच चिंता जरूर बनी हुई है। यदि इस अपील का असर ग्राहकों पर पड़ा तो छोटे शहरों और पारंपरिक बाजारों में फुटफॉल तथा नई खरीदारी में कमी आ सकती है।
व्यापारियों का कहना है कि वर्तमान समय में सहालग का सीजन चल रहा है और जून महीने तक शादी-विवाह का बाजार सक्रिय रहेगा। इसे देखते हुए अधिकांश ज्वेलरी कारोबारियों ने पहले से ही तैयारी कर रखी है। कई बड़े ऑर्डर तैयार हो चुके हैं और ग्राहक भी अपनी जरूरत के अनुसार खरीदारी कर रहे हैं। कारोबारी ऋषि प्रताप सोनी का कहना है कि शादी-विवाह भारतीय समाज की परंपरा से जुड़ा विषय है, इसलिए लोग सीमित बजट में ही सही, लेकिन खरीदारी जरूर कर रहे हैं। हालांकि, भविष्य को लेकर बाजार सतर्क है। उम्मीद है कि अगले दो से तीन महीने के भीतर स्थिति में सुधार होगा और यदि आर्थिक माहौल सामान्य रहा तो त्योहारी सीजन में कारोबार दोबारा पटरी पर लौट सकता है। सराफा व्यापारियों का यह भी कहना है कि यदि लंबे समय तक बाजार में मंदी बनी रहती है तो कारोबारी नई रणनीतियों पर काम कर सकते हैं। इनमें पुराना सोना दो और नया लो जैसी एक्सचेंज स्कीम को बढ़ावा देना विकल्प माना जा रहा है। कारोबारियों की मानें तो इससे ग्राहकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम पड़ेगा, सोने के आयात में कमी आएगी और बाजार की गतिविधियां भी जारी रह सकेंगी।
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