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ई-केवाईसी के नाम पर सीएससी संचालकों की खुली वसूली

ई-केवाईसी के नाम पर सीएससी संचालकों की खुली वसूली

संक्षेप:

Kushinagar News - कुशीनगर में बैंक ऑफ बड़ौदा का नाम बदलकर उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक रखा गया है। जिन खाताधारकों के आधार और बैंक खाते में नाम भिन्न हैं, उन्हें ई-केवाईसी कराना अनिवार्य हो गया है। सीएससी संचालक 40 से 50 रुपये वसूल कर रहे हैं, जिससे खाताधारकों का शोषण हो रहा है।

Jan 18, 2026 10:09 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, कुशीनगर
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कुशीनगर। बैंक ऑफ बड़ौदा का नाम बदलकर उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक रख दिया गया है। इस वजह से इस बैंक के उन खाताधारकों को ईकेवाईसी कराना जरूरी हो गया है, जिनके आधार और बैंक खाते में नाम भिन्न हैं। इसी का फायदा उठाकर नि:शुल्क होने वाली ई-केवाईसी हेतु सीएससी संचालकों द्वारा खुली वसूली की जा रही है। उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की सिंगहा शाखा के सामने व अगल बगल संचालित होने वाली दोनों सीएससी संचालकों द्वारा 40 से 50 रुपये तक प्रति ईकेवाईसी वसूला जा रहा है, जिससे खाताधारकों का शोषण हो रहा है। बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय होने वाले पूर्वांचल ग्रामीण बैंक का नाम बदलकर अब उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक रख दिया गया है।

नए नाम वाले बैंक ने आधार से पैसे निकालने वाले उन सभी खाताधारकों के लिए ई-केवाईसी जरूरी कर दी है, जिनके खाते और आधार के नाम में कुछ भी भिन्नता है। इसके लिए एक फॉर्म भरकर सीएससी पर अंगूठा लगवाना है। उस कागज को लेकर बैंक में आने पर खाता प्रमाणित हो जा रहा है। अब जैसे किसी महिला के नाम के बैंक खाते में देवी लिखा है और आधार में सिर्फ नाम है तो उस महिला को बैंक खाते का नाम व आधार का नाम उस फॉर्म में भरना है। उसके बाद अंगूठा लगाकर ईकेवाईसी कराना है। इसी काम के लिए सिंगहा ग्रामीण बैंक के सामने सीएससी संचालक 40 से 50 रुपये वसूल रहे हैं। सिंगहा निवासी ठाकुर कुशवाहा, फूल कुमारी, बिंदू देवी, रिंकू देवी, खुशबुन्निशा, शाकिर व मैनून आदि ने बताया कि उनके बैंक खाते व आधार में भिन्नता थी, जिसके लिए ई-केवाईसी कराने पर सीएससी संचालक ने 40 और 50 रुपये लिए। इस संबंध में सिंगहा के उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक के शाखा प्रबंधक विजय कुमार मंडल ने बताया कि जिन खाताधारकों के बैंक खाते व आधार में सरनेम या महिला खाताधारकों में देवी आदि की भिन्नता है, उन्हें बैंक से एक फॉर्म लेकर उसे भरकर सीएससी पर अंगूठा लगाकर ले आना है। उसके बाद बैंक से प्रमाणित किया जा रहा है। सीएससी संचालकों द्वारा वसूली की जानकारी मिली है। सीएससी संचालकों को बुलाकर समझाया गया है। भविष्य में गलती न करने की बात पर उन्हें छोड़ गया है।