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आयुष्मान भारत योजना : जांच शुरू होने से पहले ही लीक कर देते थे सूचना

कुशीनगर। आयुष्मान भारत योजना में पहली बार कुशीनगर जिले में अस्पतालों की आईडी हैककर...

आयुष्मान भारत योजना : जांच शुरू होने से पहले ही लीक कर देते थे सूचना
हिन्दुस्तान टीम,कुशीनगरSat, 15 Jun 2024 09:15 AM
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कुशीनगर।
आयुष्मान भारत योजना में पहली बार कुशीनगर जिले में अस्पतालों की आईडी हैककर उस पर अश्लील तस्वीरें एवं वीडियो डालकर ब्लैकमेल करने का जो मामला सामने आया है, उसकी जांच अभी भी चल रही है। अब सबकी निगाहें विवेचक की जांच पर टिकी हैं कि आगे क्या निकलकर आता है, लेकिन अब तक की जांच में जो भी तथ्य सामने आए, वे स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों को संदेह के कठघरे में खड़ा करते हैं।

आयुष्मान योजना वर्ष 2018 में लागू होने के बाद से ही इसमें कई प्रकार की कमियां रहीं, जिसकी वजह से योजना कुशीनगर जिले में सही ढंग से परवान नहीं चढ़ पाई। पहले तो वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर इस योजना में लाभार्थियों का चयन किया गया, जिसमें बहुत से नाम-पते गलत मिले। इसी की नतीजा रहा कि योजना शुरू होने के छह साल बाद भी चार लाख से अधिक लाभार्थियों का पता नहीं चल सका कि वे कौन हैं और कहां हैं? स्वास्ष्थ्य विभाग ने ऐसे लाभार्थियों को गलत मान लिया है कि उनके नाम-पते गलत हैं अथवा वे यहां से कहीं और चले गए हैं। इस तरह की गड़बड़ी का लाभ दुरुपयोग करने वालों ने खूब लिया। जन सेवा केंद्र संचालक हों या विभाग से जुड़े कुछ लोग, वे भी बहती गंगा में हाथ धोने से पीछे नहीं हटे। आयुष्मान भारत योजना के पोर्टल से जुड़े अस्पताल संचालकों से वसूली भी खूब हुई, जिसका भंडाफोड़ कुशीनगर पुलिस ने किया है। स्वास्थ्य विभाग में इस योजना के महत्वूपर्ण पदों पर रहने वाले कुछ व्यक्तियों सहित चार लोग गिरफ्तार कर जेल भेजे गए हैं। साइबर पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार किए गए इन लोगों ने पूछताछ में बताया कि कोई भी जांच शुरू होने से पहले ही सूचना लीक कर देते थे और संबंधित अस्पतालों को भेज देते थे, जिससे कोई पकड़ा नहीं जाता था। पुलिस की जांच इतने अधिक साक्ष्य मिले कि पुलिस देखकर हैरान थी। ये आरोपी इतने शातिर थे कि सरकारी गोपनीय दस्तावेज निकालकर प्रयागराज के अपने साथी को भेज देते थे, जिसके जरिए ब्लैकमेल किया जाता था। फिर भी स्वास्थ्य विभाग की तरफ से इस मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

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आयुष्मान भारत योजना के तहत अस्पतालों को भुगतान करने का अधिकार इस योजना से जुड़े लखनऊ के अफसरों को है। हमारा भुगतान से ताल्लुक नहीं है। यदि भुगतान किसी वजह से फंसता है और ऊपर से निर्देश आता तो एक पैनल बना है, जो जांच कर भुगतान कराता है। पुलिस विभाग की तरफ से गिरफ्तार किए गए डीपीसी के बारे में अभी किसी तरह की रिपोर्ट या नोटिस हमें नहीं मिला है, जिससे कोई विभागीय कार्रवाई की जा सके। इसके मिलने पर संबंधित उच्चाधिकारियों को भेजा जाएगा। उसके बाद जो निर्देश मिलेगा, उसके अनुरूप कार्रवाई की जाएगी।

डॉ. सुरेश पटारिया, सीएमओ

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इस मामले की जांच संबंधित आईओ कर रहे हैं। बकरीद बाद जांच में तेजी आएगी। क्योंकि अभी पुलिस बकरीद सकुशल संपन्न कराने में जुटी है।

सुशील कुमार शुक्ला, कोतवाल, पडरौना

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