20 लाख से अधिक लोगों की अभी भी नहीं बनी आभा आईडी
कुशीनगर में आभा आईडी लागू करने से मरीजों की चिकित्सा व्यवस्था में सुधार होगा। 27 सितंबर, 2021 को शुरू हुई इस योजना के तहत 39,45,288 लोगों की आभा आईडी बनाने का लक्ष्य है। अब तक 18,20,332 आईडी बन चुकी हैं। जल्द ही सभी को यह सुविधा प्राप्त होगी, जिससे इलाज की प्रक्रिया सरल हो जाएगी।

कुशीनगर। निज संवाददाता तेजी से बदलते दौर में चिकित्सकीय सुविधाओं को भी हाईटेक किया जा रहा है। ऐसी ही चिकित्सकीय सुविधाओं में आभा आईडी भी है, जिसके बन जाने के बाद मरीज के पर्चे और मोटी-मोटी फाइलें लेकर अस्पतालों में दौड़ने की झंझट से छुटकारा मिल जाएगा। हालांकि, अभी भी जनपद में 20 लाख से अधिक ऐसे लोग हैं, जिनकी यह आईडी नहीं बन पाई है। इस पर तेजी से काम शुरू करने के लिए लखनऊ में सीएमओ और एमओआईसी के प्रशिक्षण के बाद अब इनके मातहतों की बारी है। जल्द इन्हें भी प्रशिक्षण देकर इस पद्धति से इलाज शुरू किया जाएगा।
आभा आईडी की शुरुआत
हर प्रकार के मरीज की चिकित्सा व्यवस्था को सरल बनाने के लिए 27 सितंबर, 2021 को आयुष्मान भारत डिजिटल हेल्थ एकाउंट (आभा) आईडी की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत की थी। जिले में 39,45,288 लोगों की आभा आईडी बनाने का लक्ष्य है, जिसमें बीते 10 मई तक 18,20, 332 लोगों की आभा आईडी बन चुकी है, जो लक्ष्य का 46 फीसदी है। 9,68,556 लोगों की प्रक्रिया में है। जिन लोगों की आभा आईडी बन जाती है, उन्हें 14 अंकों की एक यूनिक आईडी जारी होती है। इस आईडी या इसमें रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर दर्ज करते ही मरीज की पूरी हिस्ट्री, जिसमें उसका कहां-कहां इलाज हुआ है और कौन सी दवा दी गई है पूरा विवरण आ जाता है। डॉक्टर उस हिस्ट्री के हिसाब से मरीज की बीमारी के बारे में जान पाते हैं और उसके बाद इलाज शुरू होता है। यही नहीं डॉक्टर की ओपीडी, हर प्रकार की जांच, फार्मेसी सबकुछ जुड़ जाता है। मसलन, यदि डॉक्टर पैथालॉजी या अन्य जांच लिखते हैं तो पर्ची लेकर जाने की जरुरत नहीं पड़ेगी, टोकन नंबर जारी होगा। वह नंबर दिखाने पर जांच के बाद कर्मी आभा आईडी नंबर पर रिपोर्ट भर देगा। रिपोर्ट मरीज के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एसएमएस से भी मिल जाएगी। डॉक्टर उस आईडी को खोलकर रिपोर्ट देखने के बाद दवा लिख देंगे। उसके बाद फार्मेसी के काउंटर पर आईडी खोलकर डॉक्टर की बताई दवा वहां से दी जा सकेगी। यह सुविधा महानगरों के बड़े सरकारी एवं निजी अस्पतालों में लागू है, अब जनपद स्तर पर भी इसे लागू किया जाना है। इसी सिलसिले में 11 मई को लखनऊ में प्रमुख सचिव की मौजूदगी में कुशीनगर, कासगंज और कौशांबी के सीएमओ व एमओआईसी का प्रशिक्षण संपन्न हुआ है। अब इनकी तरफ से अपने मातहतों फार्मासिस्ट, एएनएम, एलटी, एलए, सीएचओ, डाटा इंट्री ऑपरेटर आदि को जल्द प्रशिक्षण दिलाया जाएगा।
आभा आईडी बनाने की प्रक्रिया
एएनएम अपने ई कवच ऐप के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की आभा आईडी बना सकेंगी। आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर संजीवनी ऐप के जरिए भी आभा आईडी बनाई जा सकेगी। इसके अलावा आयुष्मान काउंटर, मेडिकल कॉलेज के पंजीकरण काउंटर पर भी मरीजों की आभा आईडी बन जाएगी। इसके लिए आधार कार्ड और एंड्रायड मोबाइल लेकर जाना होगा। क्योंकि मोबाइल में आभा का ऐप उाउनलोड किया जाएगा।
भविष्य की योजनाएं
आने वाले दिनों में कुशीनगर जनपद में भी आभा आईडी के जरिए मरीजों का इलाज होगा। इसी सिलसिले में 11 मई को लखनऊ में प्रशिक्षण हुआ है। अभी जनपद में 46 फीसदी लोगों की आभा आईडी बन पाई है। बाकी सभी का बनाने के लिए फार्मासिस्ट, एएनएम, एलटी, एलए, डाटा इंट्री ऑपरेटर आदि का प्रशिक्षण जल्द शुरू कराया जाएगा। इसके बाद मेडिकल कॉलेज में पांच और प्रत्येक सीएचसी पर दो-दो डाटा इंट्री ऑपरेटर को प्रशिक्षण देकर इसके लिए तैनात किया जाएगा। आभा आईडी के बहुत से फायदे हैं।
डॉ. चंद्रप्रकाश वर्मा, सीएमओ
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