प्रकृति के प्रकोप से हो रहे नुकसान को देख फफक पड़ते हैं किसान

Apr 04, 2026 04:39 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, कौशाम्बी
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Kausambi News - गेहूं की फसल कटने के बाद बेमौसम बारिश से किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। खेतों में पड़ी फसलें भीग जाने से किसान परेशान हैं। कई बार बारिश के कारण गेहूं के दाने बिखर रहे हैं, जिससे उनकी कमाई पर संकट आ गया है। मवेशियों के लिए भूसे की भी कमी हो सकती है।

प्रकृति के प्रकोप से हो रहे नुकसान को देख फफक पड़ते हैं किसान

गेहूं की फसल पककर तैयार होने के बाद से अब तक पांच बार हो चुकी बेमौसम बारिश से फसलों को भारी नुकसान होने लगा है। काटने के बाद खेतों में पड़ी व बोझ बनी फसलों के भीग जाने पर उन्हें समेटने व सुखाते वक्त किसान फफक कर रो पड़ते हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि फसलों को प्रकृति के प्रकोप से बचाने के लिए अन्नदाताओं को कोई राह नहीं सूझ रही है। दोआबा में इस बार रबी की खेती के लिए मौसम का मिजाज अभिशाप साबित हो रहा है। खेतों में रबी की सभी फसलें जैसे ही पककर कटाई के लिए तैयार हुईं कि बेमौसम बारिश व तूफान ने नुकसान करना शुरू कर दिया।

शनिवार सुबह पखवारे भर में जिले में पांचवीं बार बारिश हुई। तेज हवाओं के चलने से जहां कटे पड़े गेहूं व उनके बोझ इधर-उधर उड़ जा रहे हैं, वहीं भीग भी जाते हैं। ऐसे में बोझ को सुखाने व इधर-उधर बिखरे गेहूं को समेटते समय किसानों की आंखों में आंसू आ रहे हैं। इतना ही नहीं कई बार भीगने से अब गेहूं की बालियों से छूते ही दाने निकलकर बिखर रहे हैं। ऐसे में अब अन्नदाताओं के घर उनकी गाढ़ी-कमाई समूचे ढंग से पहुंचना मुश्किल हो गई है। यह हाल जिले भर के किसानों का है।--------------मवेशियों के लिए हो सकता है भूसे का संकटजिले में एक-दो दिन के अंतराल में रह-रहकर हो रही बेमौसम बारिश को देख अधिकतर किसान खेतों में खड़ी गेहूं की फसलों को मशीनों से कटवा रहे हैं। उनका मानना है कि मशीनों से कटाई कराने पर कम से कम दाना तो उनके घर पहुंच जाए। मशीनों से कटाई कराने के बाद खेतों में पड़े गेहूं के डंठल का भूसा भी मशीन बनाती है। लेकिन बारिश हो जाने से भूसा नहीं बन पा रहा है। ऐसे में आने वाले समय में मवेशियों के लिए भूसे का संकट खड़ा हो सकता है।-----------------महुवा के बागवानों को हुआ भारी नुकसानबेमौसम बारिश असर महुआ पर भी पड़ रहा है। माना जाता है कि तेज चमक के चलते महुआ के फूल मर जाते हैं। इसके चलते पैदावार न के बराबर हो जाती है। म्योहर गांव के बागवान राजू पांडेय की मानें तो ऐन वक्त पर बिजली चमकने के प्रभाव के चलते महुए का गिरना कम हो गया है। यही हाल रहा तो दो-चार दिन में महुआ का काम तमाम हो जाएगा। मौसम के चलते इस बार महुआ की खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है।---------------कोट-जिन किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा है उसका सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे के बाद रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी। इसके बाद किसानों को फसल बीमा के तहत मुआवजा मुहैया कराया जाएगा।-सुरुचि विश्वकर्मा, प्रभारी, जिला कृषि अधिकारी

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