
रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुन भाव विभोर हुए श्रोता
संक्षेप: Kausambi News - नगर पंचायत अजुहा के वार्ड नौ में श्रीमद् भागवत कथा में रुक्मिणी विवाह प्रसंग का वर्णन किया गया। कथावाचक श्याम जी महाराज ने बताया कि रुक्मिणी भगवान श्रीकृष्ण को पति के रूप में चाहती थीं। उन्होंने श्रीकृष्ण को पत्र लिखा और अंत में उनका विवाह धूमधाम से हुआ। कथा में अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
नगर पंचायत अजुहा के वार्ड नौ में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में रविवार को रुक्मिणी विवाह प्रसंग का वर्णन किया गया। इसे सुन श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथावाचक श्याम जी महाराज ने कथा का रसपान कराते हुए कहा कि विदर्भ के राजा भीष्मक के घर रुक्मिणी का जन्म हुआ था। बाल अवस्था से भगवान श्रीकृष्ण को सच्चे हृदय से पति के रूप में चाहती थीं। लेकिन उनका भाई रुक्मिणी का विवाह शिशुपाल के साथ कराना चाहता था। भाई की इच्छा जाना तो उन्हें बड़ा दुख हुआ। अत: शुद्धमति के अंतपुर में एक सुदेव नामक ब्राम्हण आता-जाता था। रुक्मिणी ने उस ब्राम्हण से कहा कि वह श्रीकृष्ण से विवाह करना चाहती हैं।

सात श्लोकों में लिखा हुआ मेरा पत्र तुम श्रीकृष्ण तक पहुंचा देना। कथावाचक ने बताया कि रुक्मिणी ने स्वयं को प्राप्त करने के लिए उपाय भी बताया। पत्र में रुक्मिणी ने बताया कि वह प्रतिदिन पार्वती की पूजा करने के लिए मंदिर जाती हैं, श्रीकृष्ण आकर उन्हें यहां से ले जाओ। पत्र के माध्यम से रुक्मिणी ने कहा कि मुझे विश्वास है कि आप इस दासी को स्वीकार नहीं करेंगे तो मैं हजारों जन्म लेती रहूंगी। मैं किसी और पुरुष से विवाह नहीं करना चाहती हूं। आचार्य ने बताया कि पार्वती के पूजन के लिए जब रुक्मिणी आई तो उसी समय प्रभु श्रीकृष्ण रुक्मिणी का हरण कर ले गए। अत: रुक्मिणी के पिता ने रीति रिवाज के साथ दोनों का विवाह कर दिया। इंद्र लोक से सभी देवताओं द्वारा पुष्पों की वर्षा की तथा खुशियां लुटाई। इस दौरान कथा सुनने वालों में संजीत कौशल, प्रदीप अग्रहरि, राजेश, संजीव केसरवानी, नीरज सहित बड़ी संख्या में कस्बे की महिलाएं व पुरुष मौजूद रहे।

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