सृष्टि सृजन का प्रथम दिवस है चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा: ओपी
Kausambi News - भारतीय नववर्ष के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने मंझनपुर नगर में पथ संचलन किया। मुख्य वक्ता ओम प्रकाश ने बताया कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा भारत की आत्मा का उत्सव है। यह दिन सम्राट विक्रमादित्य की विजय और रामराज्य की स्थापना का प्रतीक है। यह परंपरा भारत की सभ्यता और गौरव को पुनः स्थापित करने का एक सशक्त संदेश है।
भारतीय नववर्ष के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की ओर से मंझनपुर नगर से पथ संचलन हुआ। मुख्य वक्त ओम प्रकाश ने कहा, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यह केवल एक तिथि नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का उत्सव है। यह वह पावन क्षण है जब सृष्टि, प्रकृति और राष्ट्र तीनों एकसाथ नवजीवन की ओर अग्रसर होते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय नववर्ष की यह परंपरा किसी राजनीतिक आदर्श की उपज नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय व्यवस्था और मानवीय अनुभव के सम्मिलन से उत्पन्न सनातन ज्ञान की देन है। आज जब भारत अपनी सभ्यतागत पहचान को पुन: स्थापित करने की ओर अग्रसर है, वर्ष प्रतिपदा का उत्सव ‘स्व’ की पुनर्जागृति का एक सशक्त प्रतीक बन जाता है।
सम्राट विक्रमादित्य ने इसी दिन शकों पर विजय प्राप्त कर विक्रम संवत का शुभारंभ किया। छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक भी इसी दिन हुआ। हिंदवी स्वराज का उद्घोष इसी साम्राज्य की अनुगूंज थी। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का राज्याभिषेक भी इसी दिन हुआ और राम राज्य एक आदर्श राज्य का आधार स्थापित हुआ। स्वामी दयानंद सरस्वती ने इसी तिथि पर आर्यसमाज की स्थापना कर भारत के नवजागरण का बिगुल फूंका। इन तथ्यों से स्पष्ट है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा भारत के लिए केवल पंचांग का एक पृष्ठ नहीं, बल्कि सभ्यतागत पराक्रम और राष्ट्रीय गौरव का उत्सव है। इस दौरान जिला प्रचारक शिव प्रसाद, जिला संघचालक केदार, दिलीप, संजीव, श्रीकृष्ण, अश्वनी, जितेन्द्र सोनकर, जगत यादव जैसे सैकड़ों स्वयंसेवको ने कदम से कदम मिलाकर पथ संचलन किया।
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