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1 दिसंबर, 2020|2:18|IST

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नारद मोह के मंचन संग करारी की रामलीला शुरू

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कस्बे की रामलीला का शुभारंभ शनिवार रात नारद मोह के मंचन के साथ हुआ। बुंदेलखंड से आए कलाकारों ने विश्वमोहिनी के रूप से मोहित देवऋषि नारद मोह का मंचन किया। नारद मोह का मंचन देख दर्शक भाव विभोर हो गए। हरि के जयकारे से रामलीला पंडाल गुंजायमान हो उठा।

नारद मुनि हिमालय की गुफा में तपस्या कर रहे थे। नारदमुनि की तपस्या से देवराज इन्द्र भयभीत हो उठे। भय सताने लगा कि कहीं नारद तप के बल से इन्द्रपुरी पर अधिकार न कर लें। कामदेव, अफसराएं, रंभा आदि नारद की तपस्या भंग करने में असफल रहीं। कामदेव ने नारद से क्षमा मांग ली और चले गए। भगवान विष्णु ने माया से एक सुंदर नगर बसा दिया। जहां राजा शीलनिधि की पुत्री विश्वमोहिनी का स्वयंवर हो रहा था। नारद ने हरि से उनका स्वरूप मांगा इसके बाद स्वयंवर में जा पहुंचे। उन्हें यह नहीं ज्ञात था जो रूप उन्हें मिला है वह बंदर का है। स्वयंबर में विश्वमोहिनी ने नारद नहीं बल्कि भगवान विष्णु के गले में वरमाला डाल दी। गुस्से में मुनि नारद ने भगवान विष्णु को तीन श्राप दिया। कहा कि तुम मानव रूप में जन्म लोगे। तुम्हे भी स्त्री वियोग सहना पड़ेगा और बंदर ही तुम्हारी सहायता करेंगे। बुंदेलखंड से आए कलाकारों का मंचन देख दर्शक भाव विभोर हो गए। भगवान विष्णु के जयकारे से रामलीला पंडाल गुंजायमान हो उठा। इस मौके पर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष संजय जायसवाल, ज्ञानू शर्मा, बच्चा कुशवाहा, श्यामसुंदर केसरवानी, रामानंद वर्मा, पंकज वर्मा आदि मौजूद रहे।

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  • Web Title:Ramlila of Karari starts with staging of Narada Moh